उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में फंदा लगाकर खुदकुशी हो या फिर पोखरे में डूबने से मौत का मामला, तकरीबन सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर हेड इंजरी शब्द का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी सजा बेगुनाहों को भी भुगतनी पड़ सकती है। सीएमओ को पत्र भेजकर एसएसपी ने इसपर आपत्ति जताई है। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की स्पष्ट वजह लिखे जाने को कहा है।
दरअसल, कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आपसी विवाद साधने को किसी बेगुनाह के खिलाफ नामजद केस दर्ज करा दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की वजह से पुलिस भी केस दर्ज कर लेती है, लेकिन जांच में सच्चाई कुछ और आने के बाद भी बेगुनाह को इंसाफ नहीं दे पा रही है।
जानकारी के मुताबिक, फंदा लगाकर खुदकुशी मामले में भी, अगर तड़पने के दौरान चोट लगी है तो डॉक्टर हेड इंजरी ही लिख रहे है। जिस वजह से पुलिस को हत्या कर शव लटकाए जाने का केस दर्ज करना पड़ रहा है। इसके बाद पीड़ित पक्ष दुश्मनी में बेगुनाहों के नाम केस दर्ज करा देते हैं। पुलिस की जांच में निर्दोष पाए जाने पर केस से नाम तो निकाला जाता है, लेकिन फिर पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़ा हो जाता है।
वर्ष 2012 में बदला गया था प्रोफार्मा, अनुपालन नहीं
वर्ष 2012 में आए शासनादेश में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का प्रोफार्मा बदला गया था। डॉक्टरों को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि वे मौत की वजह स्पष्ट तौर पर दर्ज करें, ताकि विवेचना में दिक्कत ना हो। मगर, इस आदेश का पालन अभी तक सुनिश्चित नहीं हो सका है।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि किसी भी मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। कुछ मामलों में एक जैसा ही रिपोर्ट सामने आने पर सीएमओ को पत्र भेजा गया है।