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Gorakhpur: आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पंचकर्म से होगा असाध्य रोगों का इलाज, बनाई जाएगी 45 कुटिया

Sat, 28 May 2022 02:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

आयुष विश्वविद्यालय में पंचकर्म की सुविधा शुरू की जाएगी। मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए पहले चरण में 45 कुटिया बनाई जाएगी। एक कुटिया में एक बेड लगाया जाएगा। मरीजों के रोगों के अनुसार उनका उस कुटिया में इलाज किया जाएगा।
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आयुष विश्विद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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केरल के प्रसिद्ध पंचकर्म चिकित्सा पद्धति का लाभ महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में भी मिलेग। पंचकर्म के जरिए असाध्य रोगों का इलाज किया जाएगा। जिन रोगों की मुक्ति एलोपैथ दवाओं से नहीं होगी, उसका इलाज पंचकर्म से किया जाएगा। पंचकर्म के साथ मरीजों को योग की जानकारी भी दी जाएगी। इसके लिए आयुष विश्वविद्यालय में 45 कुटिया का निर्माण होगा।

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जानकारी के मुताबिक, पंचकर्म को आयुर्वेद की खास चिकित्सा विधि माना जाता है। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि पंचकर्म शरीर की शुद्धि (डिटॉक्सिफिकेशन) और पुनर्जीवन (रिजूविनेशन) के लिए उपयोग किया जाता है। इस चिकित्सा विधि से तीनों शारीरिक दोषों वात, पित्त और कफ को सामान्य अवस्था में लाया जाता है और शरीर से इन्हें बाहर किया जाता है। इसी प्रक्रिया को पंचकर्म कहा जाता है।

आयुष विश्वविद्यालय में पंचकर्म की सुविधा शुरू की जाएगी। मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए पहले चरण में 45 कुटिया बनाई जाएगी। एक कुटिया में एक बेड लगाया जाएगा। मरीजों के रोगों के अनुसार उनका उस कुटिया में इलाज किया जाएगा। पंचकर्म के जरिए यह पता करने की कोशिश भी की जाएगी कि पूर्वांचल के मरीजों पर यह चिकित्सा पद्धति कितनी कारगर होती है।
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वात, पित्त और कफ का किया जाता है इलाज
डॉ अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि पंचकर्म में वात, पित्त और कफ का इलाज किया जाता है। वात में 80, पित्त में 40 और कफ में 20 तरह की बीमारियों का इलाज होता है। इन बीमारियों से पीड़ित मरीज को अस्पताल में बीमारी के अनुसार डेढ़ से तीन महीने तक भर्ती रहना पड़ सकता है।

इस तरह होता है इलाज
डॉ अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि रक्त मोक्षण पंचकर्म की इस विधा में शरीर में स्थित दूषित रक्त को बाहर निकाला जाता है। इसमें दोष और मरीज की प्रकृति के अनुसार जलौकावचरण, श्रृंग, अलावू आदि के माध्यम से दोष अनुसार चयन कर रोग को ठीक किया जाता है।

पंचकर्म में होती है पांच प्रक्रियाएं
शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने की आयुर्वेदिक चिकित्सा को भी पंचकर्म ही कहा जाता है। इसमें पांच प्रक्रियाएं होती हैं - वमन, विरेचन, नस्य, रक्तमोक्षण और अनुवासनावस्ती। इन पांचों को ही पंचकर्म कहा जाता है। इसके तहत मरीजों का इलाज होता है।

 
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यह है पंचकर्म
  • वमन- रोगी को उल्टी कराई जाती है।
  • विरेचन- मलत्याग की प्रक्रिया है।
  • नस्य- नाक के माध्यम से औषधि दी जाती है।
  • अनुवासनावस्ती- तेल, घी आदि तरल खाद्य पदार्थों को मलाशय तक भेजा जाता है।
  • रक्तमोक्षण- शरीर के खून को साफ किया जाता है।

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि केरल की प्रसिद्ध पंचकर्म की पद्धति पंचकर्म के जरिए आयुष विश्ववद्यालय में भी मरीजों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए पहले चरण में 45 कुटिया बनाई जाएगी। पंचकर्म में असाध्य रोगों का इलाज हो सकेगा।
 
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