- राजकीय बौद्ध संग्रहालय परिसर में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी ललितार्चन का शुभारंभ
- गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति और कमिश्नर ने संग्रहालय के कला संरक्षण के कार्यों की सराहना की
- ललितार्चन में देश-विदेश के कलाकारों की 50 कलाकृतियां प्रदर्शित, 23 तक निशुल्क प्रवेश
गोरखपुर। ललिता ट्रस्ट और राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से शुक्रवार को राजकीय बौद्ध संग्रहालय परिसर में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी ललितार्चन का शुभारंभ हुआ। गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि कला मनुष्य की संवेदनाओं, विचारों और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है।
प्रदर्शनी के 36 पृष्ठीय कैटलॉग का विमोचन भी हुआ। प्रदर्शनी में देश-विदेश के कलाकारों की कुल 50 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों की कलाकृतियां शामिल हैं। वहीं बांग्लादेश, नेपाल, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और मॉरीशस के कलाकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं।
कमिश्नर इंद्र विक्रम सिंह ने संग्रहालय की दीर्घाओं का अवलोकन कर पुरावशेषों और कलाकृतियों की जानकारी ली और कला संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के कार्यों की सराहना की। प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियां कलाकारों को व्यापक मंच देने के साथ विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करती हैं।
वहीं, ललिता ट्रस्ट के अध्यक्ष भारत भूषण ने कलाकारों, विषय-वस्तु और कला शैलियों की जानकारी दी। उप निदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौर ने कहा कि प्रदर्शनी सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय कला संवाद को बढ़ावा देती है। कार्यक्रम में राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त पुष्पदत्त जैन, सुधा मोदी, डॉ. सुदीप्ता बी. भूषण, डॉ. प्रदीप साहनी, डॉ. गौरीशंकर चौहान, डॉ. सुरेश कुमार श्रीवास्तव, सुशील कुमार श्रीवास्तव, वीरेन्द्र कुमार आदि लोग मौजूद रहे।