उदाहरण के तौर पर उन्हें समझाने के लिए क्लास में एक्ट कराया जाए या वीडियो और फोटो से समझाया जाए, तो हमारी मेहनत का ज्यादा अच्छा परिणाम निकलकर सामने आता है और बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान भी बढ़ता है। इन हस्तपुस्तिकाओं के पीछे भी मकसद यही है कि बच्चों को रोचक तरीके से खेल-खेल में पढ़ाया जा सके। ये वीडियो बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी लाभप्रद होंगे।
वे इनका इस्तेमाल पढ़ाने की तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए कर सकेंगे। डायट प्रवक्ता जेपी ओझा ने बताया कि पहले चरण में 100 वीडियो बनाने का लक्ष्य है जिनमें से 20 वीडियो तैयार किए जा चुके हैं। वीडियो बनाने के बाद तीन मॉड्यूल में क्यूआर कोड या लिंक दिया जाएगा जिसे स्कैन करके बच्चे और अध्यापक इन वीडियो को देख सकेंगे।
गोरखपुर के शिक्षकों की अहम भूमिका
11 अध्यापकों की टीम में गगहा ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलकुर के प्रवीण मिश्र, कैंपियरगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जंगल झंझवा की सहायक अध्यापक प्रतीक्षा ओझा और डायट के जेपी ओझा का नाम शामिल है।
आधारशिला
पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई की नींव मजबूत करने के लिए ‘आधारशिला’ मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसमें बताया गया है कि इन तीनों कक्षाओं से संबंधित लर्निंग आउटकम (बच्चों के सीखने-समझने के लिए कक्षावार निर्धारित लक्ष्य) को हासिल करने के लिए शिक्षक कौन-कौन सी गतिविधियां करें। इस मॉड्यूल में गणित और भाषा पर जोर होगा।
ध्यानाकर्षण
दूसरा मॉड्यूल कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की रेमेडियल टीचिंग के लिए तैयार कराया गया है जिसे ‘ध्यानाकर्षण’ नाम दिया गया है। रेमेडियल टीचिंग उन बच्चों के लिए विशेष किस्म का प्रशिक्षण होता है जो अपनी कक्षा के अन्य बच्चों से पढ़ाई में पीछे होते हैं। इस मॉड्यूल में शिक्षकों के लिए 17 ऐसी तकनीकें डिजाइन की गई हैं जिनका इस्तेमाल करके वे बच्चों को पाठ्यक्रम समझाने-सिखाने में कामयाब हो सकें।
शिक्षण संग्रह
तीसरा मॉड्यूल ‘शिक्षण संग्रह’ है। यह ऐसा पिटारा होगा जिसमें लर्निंग आउटकम हासिल करने के लिए लेसन व टीचिंग प्लान, टाइमटेबल आदि भी होगा।