गोरखपुर। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग निवासी पूर्व आईपीएस दावा शेरपा नहीं रहे। जम्मू में सोमवार को उनका निधन हो गया। गोरखपुर से उनकी बहुत सारी स्मृतियां हैं। वह फरवरी 2018 में पहली बार नवगठित गोरखपुर जोन के एडीजी नियुक्त किए गए थे। अपनी विशिष्ट कार्यशैली और कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों के चलते वह लगातार चर्चा में रहे।
बतौर एडीजी, उन्होंने वसूली और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले गोरखपुर जोन के 42 पुलिसकर्मियों को काली सूची में डालकर उनका श्रावस्ती तबादला कर दिया था। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों द्वारा इन दागी लोगों को रिलीव न किए जाने पर उन्होंने आईजी और एसएसपी को कड़ी फटकार भी लगाई थी। इस दौरान वह काफी चर्चा में रहे। कुशीनगर में भी वे पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात रहे।
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी दावा शेरपा का कॅरिअर उतार-चढ़ाव भरा रहा। वर्ष 2008 में सीतापुर में पीएसी में तैनाती के दौरान उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन कर पुलिस सेवा छोड़ दी। इसके बाद वह दार्जिलिंग लौटकर भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय हो गए। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल बीजेपी में सचिव पद भी संभाला और अखिल भारतीय गोरखा लीग से भी जुड़े।
हालांकि राजनीति में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद उन्होंने 2012 में दोबारा पुलिस सेवा में वापसी का प्रयास किया। विवादों के बीच 2013 में उन्हें फिर से सेवा में शामिल करते हुए प्रमोशन देकर डीआईजी बनाया गया। इसके बाद 2018 में उन्हें गोरखपुर जोन का अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया। यह तैनाती उस समय प्रशासनिक हलकों में काफी सुर्खियों में रही। दावा शेरपा 2022 में एडीजी पद से सेवानिवृत्त हुए। उनका पूरा करियर उतार-चढ़ाव, वापसी और विविध भूमिकाओं से भरी एक अनोखी प्रशासनिक यात्रा के रूप में देखा जाता रहा है।