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मिलावट का खेल: गोरखपुर में सिर्फ पनीर, खोआ ही नहीं... दही भी पाउडर वाला- सहालग में रोज 600 क्विंटल की खपत

Mon, 09 Jun 2025 02:40 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

शहर के हर चौराहे पर चाट फुल्की की दुकान मिल ही जाएगी। चाट में बहुत सारे लोग दही डालकर खाते हैं। ज्यादातर दुकानों पर मिलावटी दही का ही उपयोग होता है। चाट बेचने वाले विजय ने बताया कि एक चाट 20 रुपये में बेचते हैं। इसको बनाने में 8-10 रुपये की लागत आती है। दिनभर में करीब 100 प्लेट बेच देते हैं। इसमें करीब तीन किलो दही लगती है।
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गर्मी में लस्सी की खपत बढ़ गई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मिलावटखोरों ने मुनाफे के लिए खाने-पीने की हर चीज को जहरीला बना दिया है। पनीर, खोआ के साथ ही दही भी पाउडर वाला बेचा जा रहा है। मिलावटखोर दही में हाइड्रोजेनेटेड ऑयल मिला रहे, जिसमें ट्रांस फैटी एसिड बहुत ज्यादा होता है। इससे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनता है। सूत्रों ने बताया कि दही को मीठा-गाढ़ा बनाने के लिए हानिकारक तत्वों की मिलावट की जाती है।
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इसमें वनस्पति तेल की मिलावट होती है। यह एक हाइड्रोजेनेटेड ऑयल होता है, जिसमें बहुत ज्यादा ट्रांस फैटी एसिड होते हैं। यह गंदा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है। ट्रांस फैट से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।  साथ में यह नसें सिकोड़ कर शरीर को लाचार बना सकती है।  दही व्यापारी प्रवीण यादव ने बताया कि सस्ती दही अयोध्या, कानपुर, मऊ, गाजीपुर से आ रही है। 

सहालग के समय इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। पहले के वक्त में इसे घर पर ही जमाया जाता था, मगर भागदौड़ और समय की कमी के कारण अब ज्यादातर लोग इसे बाजार से खरीद लाते हैं।  बाहर से ट्रक से यह माल आता है और खोआ मंडी समेत कई जगहों पर सप्लाई होता है। वहां से अलग-अलग दुकानों पर ऑर्डर के मुताबिक माल भेजा जाता है।

बृजेश यादव ने बताया कि इस वक्त दुकानों और शादियों में दही की सबसे ज्यादा मांग है। जिले भर में रोजाना करीब 500-600 क्विंटल दही खप रही है।  आम दिनों में यह करीब 300 क्विंटल रहती है। ज्यादातर खपत लस्सी की दुकान, चाट की दुकान और रेस्टोरेंट पर होती है।

इसके लिए पांच किलो से लेकर 15 किलो के डिब्बे में पैकिंग होती है। कुछ बड़े ब्रांड की दही आती है। इसके बाद लोकल ब्रांड की दही बाजार में सप्लाई होती है। ब्रांडेड दही की कीमत 110 से 130 रुपये प्रति किलो है। वहीं, लोकल दही 80 रुपये प्रति किलो के रेट में मिल जाती है।

चाट में डाल रहे मिलावटी दही
शहर के हर चौराहे पर चाट फुल्की की दुकान मिल ही जाएगी। चाट में बहुत सारे लोग दही डालकर खाते हैं। ज्यादातर दुकानों पर मिलावटी दही का ही उपयोग होता है। चाट बेचने वाले विजय ने बताया कि एक चाट 20 रुपये में बेचते हैं।

इसको बनाने में 8-10 रुपये की लागत आती है। दिनभर में करीब 100 प्लेट बेच देते हैं। इसमें करीब तीन किलो दही लगती है। यह आमतौर पर 80 से 90 रुपये किलो में मिल जाती है। ऑर्डर पर लोग दुकान तक पहुंचा देते हैं।
 
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600 किलो पकड़ी जा चुकी है मिलावटी दही
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले एक साल में मिलावट के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की है। इस दौरान 600 किलो मिलावटी दही भी पकड़ी गई है। इसे पाउडर से बनाया गया था और सेहत के लिए हानिकारक थी।

शुद्ध दही से बढ़ती है इम्यूनिटी
शुद्ध दही में प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम व कई सारे विटामिन होते हैं। जो आपकी हड्डियों को मजबूत नाने, इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन बढ़ाने और दिल को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं।

खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ अभियान जारी है। पिछले दिनों 600 किलो दही पकड़ी गई थी। एक बार अभियान चलाकर मिलावटी दही बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी: डाॅ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
 
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