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Gorakhpur News: जमीन, नौकरी दिलाने जैसी कई तरह की जालसाजी कर रहे बदमाश, लुटेरे-माफियाओं के बाद अब रडार पर ठग

Thu, 15 Feb 2024 04:28 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर में पहले लुटेरे-माफियाओं ने आतंक मचा रखा था। आए दिन लूट-रंगदारी जैसे घटनाएं सामने आते रहती थी। लेकिन, पुलिस की बढ़ती सख्ती की वजह से अब ये लुटेरे-अपराधी इन घटनाओं को छोड़ ठगी पर आ गए हैं। पुलिस की रडार पर अब ये ठग भी आ गए हैं।
 
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पर क्या आप जानते हैं कि यहां पर कुछ बातों का ध्यान रखना होता है, वरना आप ठगी का शिकार हो सकते हैं। - फोटो : istock
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विस्तार
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योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून का चाबुक चला तो कई पेशेवर बदमाशों और माफियाओं ने ठिकाने बदल लिए। कई मुठभेड़ में मारे गए, तो कई जेल पहुंच गए। लेकिन, कई ऐसे भी हैं, जो लूट-रंगदारी जैसी वारदातों को छोड़ कर जमीन, नौकरी के नाम पर जालसाजी में उतर गए। बदमाशों ने अपराध का तरीका बदला पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई के अंदाज को बदल लिया है। लुटेरे-माफियाओं के बाद अब रडार ठगों पर है।
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पेशेवर पर अंकुश लगाने के साथ ही पुलिस ने जालसाजी की घटनाओं पर भी कार्रवाई शुरू कर दी। पहले जालसाजी की घटनाओं में 406 (अमानत में खयानत) का केस दर्ज करने वाली गोरखपुर पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज पर जालसाजी का केस दर्ज कर भू-माफिया की कमर तोड़ दी। कमलेश यादव, ओमप्रकाश, दीनानाथ जैसे भू-माफिया जेल गए, उनकी संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई, कुछ पर बुलडोजर चला दिया गया तो कमलेश बाहर आते ही झारखंड भाग गया। जमीन के बदले रंगदारी मांगने वाले माफिया राकेश यादव, सुधीर सिंह जेल में हैं।

जमीन के नाम पर जालसाजी करने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो हर गली-चौराहे पर भू माफिया मिलने लगे। सबने किसी न किसी को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की और फिर धमकी देते। दूसरे की जमीन को अपना बताकर मामले को विवादित करने के खेल में पुलिस घुसी तो पता चला कि गोरखपुर में भू माफिया ने सीलिंग तक की जमीन की रजिस्ट्री कर दी है और इसमें रजिस्ट्रार तक शामिल हैं। सब जेल भेजे गए। पुलिस के पास कई ऐसे भी केस आए, जिसमें दूसरे की जमीन को किसी दूसरे ने अपना बताकर कूटरचित दस्तावेज से बेच दिया और तहसील में सेटिंग करके खारिज दाखिल भी करा लिया। लेकिन, अब वही तहसील पुलिस को यह सूचना देती है, कि जमीन को फर्जी तरीके से बैनामा करने की कोशिश की जा रही है।
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अपराध करने वालों पर गैंगस्टर, बंद करा दिया एनसीआर

एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर के पदभार संभालने के बाद ही आईजी कार्यालय के सामने रंगदारी के लिए फायरिंग हुई। रामगढ़ताल के पास हॉस्पिटल में मरीज की मारामारी को लेकर फायरिंग हुई। इन घटनाओं से सबक लेते हुए एसएसपी ने आदेश जारी किया कि अब एनसीआर नहीं दर्ज होगा। बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खुलेगी, गैंगस्टर लगेगा और हर मामले में केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इसका फायदा हुआ कि फायरिंग करने वाले सूरज सिंह जैसे पेशेवर बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खुली, गैंगस्टर हुआ और जेल गया। वर्तमान में पुलिस ने फायरिंग, लूट, जालसाजी करने वाले 200 से अधिक गिरोह को पंजीकृत कर लिया है, जिसकी वजह से वह अपनी संपत्ति को बचाने के जुगत में लगे हैं। अपराध से तकरीबन तौबा कर लिए है।

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जालसाजी की वारदात सामने आई तो ऑटो से कराया प्रचार

जालसाजी की एक घटना सामने आने के बाद पुलिस ने जालसाजों पर कड़ी कार्रवाई का फैसला किया। इसके लिए ऑटो से पुलिस ने प्रचार कराया कि अगर किसी ने किसी के साथ भी जमीन या फिर दूसरे तरह की ठगी की है तो वह सामने आए। नतीजा रहा कि 2016 या उससे पहले रुपया गंवाकर जमीन न पाने वाले लोग सामने आए और तब सामने आया कि कैसे एक चप्पल की दुकान चलाने वाला दीनानाथ मैरिज हाउस का मालिक बन गया। सूद पर रुपये बांटने वाला कमलेश यादव दो आईटीआई कॉलेज और करोड़ों की संपत्ति का मालिक है।

ठगी के एक से एक मामले खुले और बदमाश घिरे

सीलिंग की जमीन की रजिस्ट्री कर रुपये हड़पना। दूसरे की जमीन को अपना बताकर, उस नाम से आधार कार्ड बनाकर रजिस्ट्री करना एक ही जमीन को दो से अधिक लोगों को अपना बताकर बेच देना। जमीन के नाम पर लाखों रुपये लेना, फिर जान से मारने की धमकी देना। जमीन लेते समय बिना रुपये वाले खाते का चेक देना और फिर जबरन खारिज दाखिल कर लेना। जिंदा शख्स को मरा बताकर उसकी जमीन को बेच देना।  नौकरी के नाम फर्जी नियुक्ति पत्र देकर जालसाजी करना। टूरिस्ट वीजा थमाकर विदेश भेजने के नाम पर रुपये हड़प लेना। खुद को अधिकारी बताकर नौकरी के नाम पर रुपये लेना।  मरीज को सरकारी अस्पताल से जबरन लाकर नर्सिंग होम में भर्ती कर रुपये ऐंठना।
 एंबुलेंस की सांठगांठ से गरीबों से ठगी करना, कई बार मौत भी हुई।

 
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