एक बच्चा रोहित( काल्पनिक नाम) ने बताया कि बाहर से चीन वाला डिश खाने का मन करता है, लेकिन हमलोगों को पैसे नहीं मिलते हैं, इसलिए आकाश और उसके एक दोस्त रवि के साथ मिलकर अपहरण की कहानी रची गई। रवि बुधवार को सुबह बाइक लेकर आया, उसके साथ बैठकर आकाश और वह जीरो प्वाइंट कालेसर की तरफ निकल गए।
सोशल मीडिया और मौजूदा तकनीक का असर किस कदर बच्चों के सिर चढ़कर बोल रहा है, इसका अंदाजा सहजनवां में बीते बुधवार को 13 वर्ष के बच्चे के अपहरण की सूचना झूठी से लगाया जा सकता है। तीन बच्चों ने मिलकर चाउमीन-बर्गर और मोमोज पार्टी करने के लिए घरवालों से 2.60 लाख रुपये मांगे थे।
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यही नहीं, पुलिस काे चकमा देने के लिए बच्चों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए रुपये मांगे। बच्चे के बरामद होने के बाद पुलिस ने तकनीक से ही पूरा मामला खोला भी। बाद में तीनों बच्चों को आमने-सामने बैठाकर कड़ाई से पूछताछ की तब उन्होंने सारी सचाई साफ होती चली गई।
बर्गर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
पुलिस के अनुसार, सहजनवां के वार्ड नंबर 10 लुचुई के तीन बच्चे (नाम काल्पनिक) आकाश (13) व उसकी बुआ का लड़का रोहित (16) और रवि (15) ने मिलकर अपहरण की कहानी रची थी। आकाश ने बताया कि उसकी बुआ का लड़का रोहित नोएडा में कक्षा सात तक पढ़ा है। उसके पिता बाहर कमाने चले गए, तभी से बुआ और रोहित सहजनवां स्थित उसके घर पर रहते हैं।
रोहित ने बताया कि बाहर से चीन वाला डिश खाने का मन करता है, लेकिन हमलोगों को पैसे नहीं मिलते हैं, इसलिए आकाश और उसके एक दोस्त रवि के साथ मिलकर अपहरण की कहानी रची गई। रवि बुधवार को सुबह बाइक लेकर आया, उसके साथ बैठकर आकाश और वह जीरो प्वाइंट कालेसर की तरफ निकल गए।
सोशल मीडिया।
- फोटो : amar ujala
रोहित और आकाश ने बताया कि उन्हें जानकारी थी कि एक खेत बिका है, जिसके ढाई लाख रुपये मिले हैं, वह घर में रखे हैं और इसके अलावा 10 हजार रुपये पिता जी दे ही देंगे। इसके बाद घर पर व्हाट्सएप कॉल कर रुपये मांगे। रोहित ने बताया कि बाद में कॉल करने पर परिजनों की रोने की आवाज सुनी तो हम लोग आकाश को दाना-पानी होटल के पास छोड़कर भाग गए।
पिता के नंबर से बनाया व्हाट्सएप अकाउंट तो पकड़े गए
तीनों बच्चों ने मिलकर कहानी फिल्मी तरीके से रची थी। आकाश के पिता कीपैड वाला मोबाइल फोन चलाते हैं। घटना से एक दिन पहले उनके नंबर से दूसरे मोबाइल पर व्हाट्सएप अकाउंट चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जिसका ओटीपी नंबर पिता के मोबाइल पर आया था।
पुलिस को शंका हुई कि बार-बार बुआ के नंबर पर व्हाट्सएप कॉल आ रही है तो जरूर कोई जानने वाला इसमें शामिल है। पुलिस ने आकाश के पिता का मोबाइल फोन चेक किया तो उसपर ओटीपी नंबर आया। तब पुलिस को बच्चों पर शक हुआ और पूछताछ में उनका भेद खुल गया।
पुलिस को छकाता रहा आकाश
सहजनवां पुलिस को बुधवार शाम 4:30 बजे सूचना मिली कि आकाश का स्कूल जाते समय अपहरण हो गया है और उसे छोड़ने के लिए घरवालों से 2.60 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है। इसके बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की तो परिजनों के पास फिर कॉल आई कि आकाश दाना-पानी होटल के पास मौजूद है, सूचना पर पुलिस वहां पहुंची और आकाश मिल गया।
आकाश ने पुलिस को बताया कि जब वह स्कूल जाने के लिए वैन का इंतजार कर रहा था कि तभी सफेद स्कार्पियो से चार लोग आए, उसे पापा की फोटो दिखाकर बोले कि तुम्हारे दादी की तबीयत खराब है, तुम्हें घर बुलाया गया है। गाड़ी में बैठते ही उसके मुंह पर रुमाल लगाकर बेहोश कर दिया गया। जब होश आया तो देखा कि वे उसे ले जाकर कालेसर पुल के पास छोड़ दिए। वह पैदल घर आ रहा था, रास्ते में एक अंकल मिले उनके मोबाइल से घर पर सूचना दी।
एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया कि साइबर सेल, साइबर अपराध थाना और सहजनवां थाने की पुलिस ने इस घटना को खोलने में अहम भूमिका निभाई है। बच्चों ने बहुत ही शातिर ढंग से कहानी रची और उसको अंजाम दिया था। पहले दिन से ही पुलिस को आशंका थी, जांच पड़ताल के बाद सारी कहानी सामने आ गई।