इस काम के लिए अनुमानित लागत डेढ़ लाख रुपये भी आर्व सिटी के प्रोपराइटर द्वारा जमा नहीं करवाई गई थी। ऐसे में उक्त प्रोपराइटर के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज करवाया गया है।
मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि ऊर्जा मंत्री ने कुशीनगर से लखनऊ वापस जाते वक्त एक फोटो भेजी थी। इसकी जांच करवाकर इसे व्यवस्थित करवाने का निर्देश अधिशासी अभियंता को दिया। जांच के बाद वहां कुछ और ही कहानी मिली। जिम्मेदारों से जांच कर सही कार्रवाई करने और आगे से ऐसी लापरवाही न हो, इसे सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया है।
बिजली थाना प्रभारी संजय सिंह ने कहा कि मोतीराम अड्डा क्षेत्र के अवर अभियंता की तहरीर पर आर्व सिटी प्लॉटिंग के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया है। मौके पर जाने पर पता लगा कि 14 वर्ष पहले वह लाइन खींची गई थी। पूरे मामले में जांच के बाद दोषी, जिम्मेदारों की लापरवाही या अन्य बातें प्रकाश में आएंगी।
डेढ़ वर्ष पहले शुरू की प्लॉटिंग तो मेरी क्या गलती?
आर्व सिटी प्लॉटिंग के प्रोपराइटर दीपक पाठक ने बताया कि डेढ़ वर्ष पहले हमने वहां प्लॉटिंग का काम करना शुरू किया। बिजली के खंभे पर कंपनी का नाम लिखने से बिजली चोरी का आरोपी बना दिया गया। जबकि, मैंने पूरी बात संबंधित सभी जिम्मेदारों को बताई थी। अगर पोल पर नाम लिखना अपराध है तो निगम बताए इसके पहले कितने खंभों पर नाम लिखने या किसी प्रचार-प्रसार वाले पर मुकदमा दर्ज करवाया है।