गोरखपुर शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने की पुलिस की पहल को अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) आगे बढ़ाएगा। अब प्रमुख मार्गों के किनारे आवासीय या व्यावसायिक निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने का आवेदन जमा करते समय यह सहमति देनी होगी कि वे निर्माण के बाहरी हिस्से यानी सड़क की तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे।
निर्माण कार्य पूरा होने पर पूर्णता प्रमाप पत्र जारी करने से पहले प्राधिकरण की टीम इसकी जांच भी करेगी। फिलहाल यह शर्त प्रमुख मार्गों के लिए ही लागू की जाएगी, कॉलोनी के भीतर होने वाले निर्माणों में सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्णय एच्छिक होगा। हालांकि प्राधिकरण, संबंधित को इसके लिए प्रेरित करेगा कि यह जनसामान्य के साथ ही खुद की सुरक्षा के लिए भी बहुत कारगर प्रयास होगा। जीडीए अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा के मद्देनजर इस तरह की पहल करने वाला जीडीए, प्रदेश का पहला प्राधिकरण बन जाएगा। इस पहल को लेकर गत बुधवार को हुई जीडीए बोर्ड की बैठक में भी सभी सदस्यों ने सहमति जताई है।
एडीजी अखिल कुमार और कमिश्नर रवि कुमार एनजी की पहल पर ग्राम पंचायतें भी अपनी निधि से गांवों में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगवा रही हैं। ऐसे में प्राधिकरण की इस पहल से शहर से लेकर गांवों तक का इलाका सीसीटीवी कैमरे की जद में आ जाएगा। इससे कानून व्यवस्था चुस्त- दुरुस्त करने में पुलिस एवं प्रशासन को तो मदद मिलेगी ही लोगों में भी सुरक्षा का भाव बढ़ेगा।
यातायात व्यवस्था में भी मदद करेगा जीडीए जीडीए यातायात व्यवस्था सुगम बनाने में भी पुलिस एवं यातायात विभाग की मदद करेगा। इसके लिए भी जीडीए बोर्ड बैठक में सहमति बनी है। जीडीए इन कार्यों में सहायता करेगा।
- बाएं लेन से एंबुलेंस एवं इमरजेंसी वाहन को पास कराए जाने के लिए चौराहों को लैफ्ट फ्री कराया जाना
- चौराहों को अतिक्रमण मुक्त कर उसका चौड़ीकरण किया जाना
- सेफ्टी, सिक्योरिटी के लिए पुलिस बूथ स्थापित किया जाना
- जेब्रा क्रासिंग/पाथ-वे व आई लैंड इत्यादि का निर्माण
मानचित्र के लिए आवेदन करते समय ही प्रेरित करेंगे
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि प्रमुख मार्गों के किनारे निर्माण कराने वाले लोग बाहर की तरफ यानी सड़क की तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे। मानचित्र के लिए आवेदन करते समय ही उन्हें प्रेरित कर उनसे सहमति ली जाएगी। कॉलोनी के भीतर निर्माण कराने वालों को भी इसके फायदे गिनाए जाएंगे और उन्हें भी प्रेरित किया जाएगा। मगर इसके लिए मानचित्र के आवेदन के दौरान कोई शर्त नहीं जोड़ी जाएगी। संबंधित का यह निर्णय ऐच्छिक होगा। इससे खुद के साथ ही दूसरों की सुरक्षा भी आसान होगी। अपराध होने की दशा में पुलिस को काफी मदद मिलेगी और मामलों का जल्द खुलासा हो सकेगा।