कोरोना पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषण भी अधिक खतरा बना हुआ है। जनरल फिजिशियन डॉ. बीके सुमन बताते हैं कि जिनको श्वसन संबंधी बीमारी है उनके लिए वायु प्रदूषण जानलेवा है। शहर में उड़ रही धूल और धुएं के चलते सबसे अधिक परेशानी उन्हीं लोगों को होगी, जो पहले से ही बीमार हैं। स्वस्थ लोग भी प्रदूषण से बीमार हो सकते हैं। एक अमेरिकी जनरल में इस बात का उल्लेख है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
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चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा ने कहा कि कोविड के दौरान कई मरीजों के फेफड़े में खून जम गया था। मरीज तो ठीक हो गए, लेकिन खून के थक्कों की वजह से उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो गई। ऐसे मरीज अगर प्रदूषित वातावरण में जाएंगे या फेफड़े से अधिक कार्य लेने का प्रयास करेंगे तो जीवन पर खतरा हो सकता है। इसलिए अगर कोविड संक्रमित हो चुके हैं तो सेहत का नियमित ध्यान रखें। शरीर को पूरा आराम दें। इसके अलावा ऐसे लोग निमोनिया और इंफ्लुएंजा का टीका जरूर लगवा लें।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने कहा कि कोरोना पीड़ितों में हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। सडेन कॉर्डियक डेथ के मामले भी आ रहे हैं। इसमें कोरोना भी एक पक्ष हो सकता है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी बचपन से या जन्मजात होती है। जब वे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तब इसका पता चलता है। युवा भी बच्चों व बुजुर्गों की तरह अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। नियमित जांच से बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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