- सीओपीडी के कारण दुनिया भर में हर साल 30 लाख लोगों की होती है मौत
- डॉक्टरों ने बताया कि वर्तमान में सीओपीडी का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ठंड की शुरुआत के साथ ही सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। खासकर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों को सुबह और शाम के समय ज्यादा तकलीफ हो रही है। खांसी, बलगम और सांस फूलने की शिकायतों के साथ मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में प्रदूषण और नमी के कारण वायुमार्ग सिकुड़ जाते हैं, जिससे पहले से सीओपीडी से जूझ रहे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। सीओपीडी सांस फूलने, लगातार बलगम और खांसी का कारण बनती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग के विभागाध्यक्ष एक अनुमान के मुताबिक, सीओपीडी के कारण हर साल दुनिया भर में 30 लाख मौतें होती हैं।
दुनिया में बढ़ती उम्र की आबादी और तंबाकू के धुएं जैसे जोखिम वाले कारकों के लगातार संपर्क में रहने के कारण यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। डॉ. अश्वनी ने बताया कि तंबाकू के धुएं और सांस के जरिए शरीर में जाने वाले अन्य जहरीले कणों और गैसों के संपर्क में आना सीओपीडी के लिए मुख्य जोखिम कारक है, हालांकि हाल के शोध से संकेत मिलता है कि सीओपीडी आनुवंशिक और पर्यावरणीय जोखिम कारकों के संयोजन से होता है जो जीवन भर घटित होते हैं, गर्भ में शुरू होते हैं एवं बचपन और किशोरावस्था के दौरान जारी रहते हैं।
डॉ. अश्वनी ने बताया कि सीओपीडी के लिए कोई वर्तमान में इलाज नहीं है, लेकिन इसे रोकने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कार्रवाई भी की जा रही है। इससे बचने के लिए नागरिक वायु स्वच्छता के अच्छे संरक्षक हो सकते हैं और मरीज और परिवार दोनों ही अधिक देखभाल कर मदद कर सकते हैं। इसमें आवश्यक दवाएं, नियमित स्पिरोमेट्री जांच और दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों के लिए टेलीहेल्थ एक्सेस जैसे अन्य उपचार भी शामिल किया गया हैं।
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बचाव के उपाय
- धुएं और प्रदूषण से दूर रहें।
- खासकर अगरबत्ती, धूप आदि से बहुत ठंडे और बंद कमरों में न रहें।
- सुबह शाम के समय सांस के मरीज बहर जाने से बचें।
- नियमित रूप से इनहेलर का उपयोग करें और डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।
- प्रोटीन युक्त आहार लें और पर्याप्त पानी पीएं।
- प्राणायाम करें, ताकि फेफड़ों की क्षमता बनी रहे।