सरकारी होम्योपैथिक अस्पतालों में फर्जी ओपीडी की रिपोर्ट लगाने वाले डॉक्टरों की अब खैर नहीं है। शासन ने इसपर अंकुश के लिए नई व्यवस्था बना दी है। अब मरीजों को इलाज के पहले आईडी प्रूफ (पहचान पत्र) देना होगा। तभी इलाज और दवाएं मिलेंगी। पहचान पत्र के रूप में मरीजों को आधार कार्ड, वोटर कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस में से किसी एक की फोटोकॉपी साथ लानी होगी। साथ ही मोबाइल नंबर भी दर्ज कराना होगा।
होम्योपैथिक चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों के नाम और मोबाइल नंबर के साथ आईडी प्रूफ की फोटोकॉपी देने की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। विभाग के जानकारों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि शासन को यह शिकायत लगातार मिल रही थी कि चिकित्सक ओपीडी रजिस्टर में फर्जी तरीके से नाम दर्ज कर नौकरी बचा रहे हैं। जिला अस्पताल की होम्योपैथ चिकित्साधिकारी डॉ. मीना पुष्कर दोहरे ने बताया कि शासन के निर्देश के बाद मरीजों के नाम और मोबाइल नंबर समेत उनसे आईडी प्रूफ लिए जा रहे हैं।