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कोरोना से जंग जीत चुके लोगों के रक्त के नमूनों से होगा शोध, तैयार किया जाएगा डाटा

Sun, 17 May 2020 05:53 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

  • कोरोना से जंग जीत चुके लोगों के रक्त के नमूनों से होगा शोध,
  • आईसीएमआर ने 22 के रक्त के नमूने लिए, ये सभी लोग बस्ती के
  • मरीजों की तीन श्रेणियां बनाकर लिए गए नमूने
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Coronavirus Testing - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने शोध के लिए कोरोना वायरस से जंग जीत चुके 22 लोगों के रक्त के नमूने लिए हैं। ये सभी लोग बस्ती जिले के हैं। आईसीएमआर की देखरेख में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) की टीम ने नमूने लिए हैं। नमूनों को आरएमआरसी की टीम दिल्ली भेजेगी। वहां पर इनमें एंटीबॉडी की जांच की जाएगी।

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आईसीएमआर के प्लानिंग कोआर्डिनेटर डॉ. रजनीकांत ने बताया कि कोरोना वायरस से जंग जीत चुके लोगों का डाटा तैयार किया जा रहा है। पूर्वांचल के जिलों को इसमें शामिल किया गया है। इसकी शुरुआत बस्ती से की गई है। बस्ती से 22 ठीक हो चुके लोगों के रक्त के नमने आरएमआरसी की टीम ने लिए हैं।

नमूने लेने के लिए तीन श्रेणियां बनाई गईं हैं। इनमें एस्म्टिोमेटिक, माइल्ड और अति गंभीर मरीज शामिल हैं। लक्षण के आधार पर इन पर शोध किए जाएंगे। इन लोगों से यह भी जानकारी ली गई है कि इलाज के दौरान उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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ठीक हो चुके सभी मरीजों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे

बीमारी का सबसे ज्यादा प्रभाव शरीर के किस अंग पर पड़ा? कौन-कौन सी दवाएं इलाज के दौरान इस्तेमाल की गईं? इन सभी जानकारियों के आधार पर अध्ययन पूरा किया जाएगा।
 
बस्ती से हुई शुरुआत के बाद अब संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुुर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया जिले से भी ठीक हो चुके लोगों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इन जिलों में सबसे अधिक मरीज बस्ती में अब तक ठीक हुए हैं। बस्ती में 24 मरीज, सिद्धार्थनगर में 17, देवरिया में दो, कुशीनगर में दो, महराजगंज में सात, संतकबीरनगर में 17 और गोरखपुर में दो मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं। आईसीएमआर इनके भी नमूने लेगा।
 
अलक्षणिक मरीजों की वजह से हो रहा शोध
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि देश भर में कोरोना के अलक्षणिक मरीज सबसे ज्यादा मिले हैं, जबकि विदेशों में लक्षण वाले ज्यादा मरीज मिले हैं। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि आखिर जो मरीज ठीक हुए हैं, उनकी प्रतिरोधक क्षमता कैसे थी ? वह कितने दिनों के अंदर ठीक हुए? कौन सी दवा कारगर रही ?
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