बड़हलगंज में सरयू नदी से पकड़ी गई 87 किलोग्राम की मछली
सरयू नदी में मछली पकड़ने के दौरान मिली 87 किलो की मछली कैट फिश की हुन्ना प्रजाति की है। बड़हलगंज मुक्ति धाम के पास बुधवार को मिली 87 किलो की भारी भरकम मछली को लेकर तमाम पाठकों ने जानना चाहा था कि यह किस प्रजाति की है, इसका नाम क्या है ?
कुछ पाठकों ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला ऑफिस में फोन करके इस मछली के बारे में कई सवाल किए थे, मसलन यह सरयू नदी में कहां से आई है ? क्या यह खतरनाक होती है ? पाठकों की उत्सुक्ता को शांत करने के लिए अमर उजाला संवाददाता ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान के प्रो. सुनील श्रीवास्तव को इस मछली की फोटो दिखाकर तफसील से जानकारी हासिल की।
प्रो. सुनील ने बताया कि इस मछली की बड़ी खासियत यह है कि तैरने के समय हुन-हुन की आवाज निकालती हैं। यही वजह है कि इसका नाम हुन्ना रख दिया गया। इसका बायोलिजिकल नाम रिटा-रिटा है। बिहार में इसे गोछीटा भी कहते हैं। यह मांसाहारी होती हैं और जानवरों का पीछा करके उनका शिकार करती हैं। नदी में खोह (धारा से बने होल) में छिपकर रहती है।
मछली के शरीर पर काले रंग के दो स्पॉट
इस प्रजाति की मछली के शरीर पर काले रंग के दो स्पॉट होते हैं। उनकी औसत आयु 10 से 15 वर्ष है। अमूमन, ये मैदानी इलाकों की नदियों में पाई जाती हैं। इनका वजन तीन से चार किलो ही होता है, लेकिन अगर ये अपनी उम्र तक जीवित रह जाएं तो वजन 100 किलो तक हो सकता है। मांसाहारी होने के चलते इनके शरीर का विकास तेजी से होता है।
कैट फिश में गोंच, बघार, थाई मांगूर आदि प्रजातियां पूर्वी उत्तर प्रदेश में पाई जाती हैं। प्रो. सुनील का मानना है कि गंगा नदी की सफाई के दौरान बहुत सारी कैट फिश छोटी नदियों में आ गईं हैं। उनमें से यह एक हो सकती है।
खनिज और विटामिन का खजाना है मछली
हुन्ना मछली सिर्फ सुपाच्य ही नहीं खनिज और विटामिंस का भंडार है। इसमें 13.22 फीसदी तक प्रोटीन के अलावा फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, सल्फर, तांबा, जस्ता, मैग्नीज, क्लोरिन और आयोडीन आदि खनिज मिलते हैं।
मुंह के पास तीन बारबर होते हैं
हुन्ना मछली के मुंह के पास तीन बार्बर (देसी भाषा में मूंछ) होते हैं। जबकि गोंच के दो बार्बर पाए जाते हैं। गोंच और हुन्ना में फर्क यह है कि गोंच के शरीर पर कई धब्बे होते हैं। पूंछ की ओर भी धब्बे होते हैं जबकि हुन्ना में पूंछ पर धब्बे नहीं होते हैं।