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मोहल्ला गाथा: अकबर के पिता हुमांयू के नाम पर बसा था हुमायूंपुर मोहल्ला, जानिए इसका इतिहास

Fri, 24 Mar 2023 09:23 PM IST
vivek shukla डॉ. दानपाल सिंह, गोरखपुर।
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हुमायूंपुर मोहल्ला। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर शहर के सबसे पुराने व बड़े मोहल्लों की बात की जाए तो इसमें हुमायूंपुर प्रमुख है। गोरखनाथ मंदिर के पश्चिम में बसाव के अगले क्रम में यह सबसे प्रमुख रहा है। इसकी पतली और सकरी गलियां और पुराने मकान भी इसकी प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं। आकार में अत्यधिक बड़ा होने के कारण इस मोहल्ले को दो भागों में विभाजित कर दिया गया है उत्तरी हुमायूंपुर और दक्षिणी हुमायूंपुर।
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जहां तक इस मोहल्ले के नामकरण का सवाल है इसके संदर्भ में दो तथ्य सामने आते हैं। पहला यह कि अकबर के समय में इस क्षेत्र पर मुगलों का पहला आक्रमण 1561 ई. में हुआ था। अकबर के सेनापति टोडरमल और फिदाईन खां ने इस आक्रमण का नेतृत्व किया था।

उस दौरान मुगलों ने गोरखपुर को अपना एक जिला (शहर गोरखपुर) घोषित किया। शहर गोरखपुर में मुगलों की छावनी गठित की गई। इसी क्रम में फिदाईन खां ने अकबर के पिता हुमायूं के नाम पर इस मोहल्ले की स्थापना की।
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वहीं, दूसरे तथ्य में यह आता है कि इस मोहल्ले का नामकरण हजरत हुमायूं खां शहीद के नाम पर हुआ है। इस तथ्य को बल प्रदान करता है उत्तरी हुमांयूपुर अंसार रोड पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराना वह मकबरा जो आज भी शहीद मकबरा के नाम से प्रसिद्ध है।
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यह मकबरा खंडहर हो गया है, लेकिन वहां स्थित मजार अभी भी सुरक्षित है। तथ्यों को ध्यान से देखने और मोहल्ले के बसाव के आधार पर प्रथम तथ्य अत्यधिक मान्य है। वर्तमान में इस मोहल्ले को हनुमानपुर मोहल्ले के नाम से भी जाना जाता है।

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