होली का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, होलिका दहन के मुख्य कारण से सभी परिचित है। दानराज हिरण्यकशिपु के अंत और प्रहलाद की होलिका से रक्षा के उपलक्ष्य में होलिका दहन किया जाता है। इसके अगले दिन होली मनाई जाती है। यह पर्व शत्रुता को भुलाकर मित्रता करने का है।
ऐसे करें होलिका दहन
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, शुभ मुहूर्त में स्नानादि के बाद होलिका दहन के समय दाहिने हाथ में जल, चंदन, अक्षत, द्रव्य आदि लेकर संकल्प करें। संकल्प करके किसी पेड़ की डाली को आरोपण कर उसके चारों ओर सूखी लकड़ी, कंडे, सूखा पुआल व झाड़-झंखाड़ रखें और होलिका का ध्यान करें। इसके बाद षोडशोपचार पूजन कर प्रार्थना करें। फिर अछूत कहे जाने वाले व्यक्ति के घर से अथवा प्रसूतिका स्त्री के घर से अग्नि मंगाकर या न उपलब्ध होने पर वहीं अग्नि प्रज्वलित कर होलिका जलाएं।