रंगोत्सव होली 10 मार्च को मनाया जाएगा। जबकि होलिका दहन नौ मार्च को होगा। इस बार की होली सामाजिक समरसता लेकर आएगी। साथ ही राष्ट्र का उत्थान होगा। ऐसा होली पर बनने वाले ध्वज नामक महाऔदायिक योग से होगा।
होली फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को फाल्गुनिका के नाम से जानी जाती है। इस दिन आमोद-प्रमोद के साथ बुराई के प्रतीक होलिका का दहन किया जाता है और आने वाले वर्ष की शुभता की कामना की जाती है। वैसे तो हर त्योहार का अपना एक रंग होता है लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का एक त्योहार पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में मनाया जाता है और वह है होली। इसमें एक ओर रंगों के माध्यम से संस्कृति के रंग में रंगकर सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं वहीं दूसरी ओर धार्मिक रूप से भी होली बहुत महत्वपूर्ण हैं।
ये है मान्यता
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हिरण्यकश्यप ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका (जिसे न जलने का वरदान प्राप्त था) के जरिये जिंदा जला देना चाहा था लेकिन भगवान ने भक्त पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिये बनाई चिता में स्वयं होलिका जल मरी। इसलिये इस दिन होलिका दहन की परंपरा भी है। होलिका दहन से अगले दिन रंगों का खेल खेला गया।