आरोप है कि इसके बाद 30 मार्च 2002 को सत्यपाल सिंह ने धर्मेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 06 अक्तूबर 2004 में अपर सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के आधार पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट ने भी 12 दिसंबर 2012 को आजीवन कारावास की सजा को कायम रखा तो सत्यपाल फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में थी। बाद में पिपराइच थाने में उसके खिलाफ 2016 में रंगदारी मांगने का भी केस दर्ज किया गया। न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोपी भी बनाया गया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।
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बाद में कोर्ट के आदेश पर उसके खिलाफ 12 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। एसटीएफ ने आरोपी को बुधवार की रात में गिरफ्तार कर लिया।
एसटीएफ के मुताबिक, फरारी के समय सत्यपाल सिंह ने नेपाल में अपना ठिकाना बना लिया था। वहीं पर अपना काम-धंधा भी फैलाने लगा था। वह गांव से पूरी तरह से कटना चाहता था और इसके लिए अपनी जमीन को बेचने का सौदा भी तय कर लिया था। इधर, पुलिस को इसकी जानकारी मिल गई थी कि वह रेलवे स्टेशन के पास टैक्सी से आने वाला है। एसटीएफ सतर्क हो गई और मुखबिर की सूचना पर पुलिस रेलवे चौकी से रेल म्युजियम के बीच में आरोपी को दबोच लिया गया। एसटीएफ गोरखपुर यूनिट प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि तलाशी में उसके पास से एक तमंचा भी मिला है।
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रुपये ने डाल दी दोस्ती में दरार
गांव वालों ने बताया कि एक समय था, जब सत्यपाल सिंह व धर्मेंद्र सिंह अच्छे दोस्त थे। दोनों साथ में ही ठेका का काम भी करने लगे थे, लेकिन बाद में रुपयों के लेन-देन में दोनों के रिश्ते में खटास पड़ गई। बात इतनी बिगड़ी कि धर्मेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई। इस घटना का असर गांव के परिवार पर भी पड़ा। गांव में सत्यपाल सिंह की बुजुर्ग मां और भाई हैं, जो अक्सर इधर-उधर ही रहते हैं। कभी-कभार ही गांव में नजर आते हैं।