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जानिए पिछले दस सालों में किस-किस वायरस ने दी है दस्तक, ये है बड़ी वजह

Tue, 14 Apr 2020 10:34 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : PTI
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प्रकृति से छेड़छाड़ और पशु-पक्षियों को परेशान करने से दुनिया में नई-नई बीमारियां फैल रही हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो जब वन्य जीवों के साथ छेड़छाड़ होती है तो वह स्ट्रेस (तानव) में आकर वायरस और बैक्टीरिया दोनों छोड़ते हैं। यह वायरस मनुष्य के लिए खतरनाक होते हैं।  
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पिछले एक दशक की बात करें तो छह से अधिक नए वायरस ने नई बीमारियां दी हैं। पहले जहां 30 से 40 सालों में कोई नया वायरस आता था, वह अब दो से तीन सालों में आना शुरू हो गया है। इसकी एक वजह ग्लोबलाइजेशन और म्यूटेशन भी है।

कोरोना कोई पहली महामारी नहीं है। इससे पहले भी तमाम वायरस महामारी फैला चुके हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ अमरेश सिंह के मुताबिक पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), स्वाइन फ्लू, डेंगू जैसी बीमारियां हर साल दिक्कत बढ़ाती हैं।
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बीमारी और वायरस फैलने का सबसे बड़ा कारण ग्लोबलाइजेशन है। पहले विदेशों की यात्रा कम होती थी। किसी एक देश में बीमारी फैलती थी तो वह वहीं तक रहती थी। अब किसी एक देश में बीमारी फैलती है तो वह कई देशों में फैल जाती है। इसी तरह म्यूटेशन की वजह से पशु पक्षी सहित अन्य जीव अपना स्वभाव बदलकर एंटीजन छोड़ रहे हैं, जो मानव जाति के लिए सबसे खतरनाक है।

म्यूटेशन ने बना दिया वायरस को खतरनाक
डॉ अमरेश के मुताबिक म्यूटेशन ने वायरस को खतरनाक बना दिया है। दरअसल, मानव जीवन का हस्तक्षेप वन्य जीवों के दायरे में बढ़ा है। पशु, पक्षियों में वायरस और बैक्टीरियां दोनों होते हैं। जब वन्य जीवों के साथ छेड़छाड़ होती है तो वह स्ट्रेस (तानव) में आकर वायरस और बैक्टीरिया दोनों छोड़ते हैं।

उनके स्ट्रेस की वजह से वायरस और बैक्टीरिया के रूप में बदलाव होता है, जो ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। म्यूटेशन के कारण उनके जीन में भी बदलाव होता है। यही बदलाव कोरोना, स्वाइन फ्लू, इबोला जीका, मर्स जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं।
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बचाव के लिए पहले जानवरों पर हो शोध
डॉ अमरेश के मुताबिक कोरोना के अलावा एचआईवी, रैबीज, सोर्स, मर्स और इबोला जैसी बीमारियों का अब तक कोई इलाज नहीं आया है। इनमें कई वायरस और बीमारियां सबसे पहले जानवरों में ही थीं। बैक्टीरिया हर आधे घंटे में दोगुना हो जाते हैं, जबकि वायरस  इनसे ज्यादा तेजी से पनपते हैं। सबसे पहले इन बीमारियों का शोध जानवरों पर होना चाहिए।

एक नजर बीमारियों पर
साल          बीमारी
2007-      क्रिमियन कांगो
2009-      स्वाइन फ्लू
2012-      मर्स
2014-      इबोला
2015-      जीका
2016-      डेंगू
2019-      कोरोना
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