यह खबर जैसे ही राजा को हुई, उन्होंने चोरों को गिरफ्तार करवा लिया। हालांकि, बाद में चोरों द्वारा माफी मांगने और फिर ऐसी गलती न करने की बात पर उन्हें छोड़ दिया गया। मंदिर के उत्तर तरफ तीन विशाल पोखरे आज भी मौजूद हैं। बताया जाता है कि इस पोखरे में रानियां स्नान करने आती थीं। इतिहासकारों ने भी कटहरा शिव मंदिर का उल्लेख किया है।
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मंदिर के पुजारी महंत बहरैची दास ने बताया कि सच्चे दिल से आराधना करने वाले भक्तों की कामना भगवान शिव जरूर पूरी करते हैं। इस मंदिर परिसर में धर्मशाला का भी निर्माण कराया गया है। पूरे सावन भर यहां दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं।
महाशिव रात्रि एवं सावन के महीने में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। यहां जनपद के अलावा गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बिहार एवं नेपाल राष्ट्र के भी श्रद्धालु भगवान शिव को जलाभिषेक करने आते हैं।
मंदिर पुजारी महंत बहरैची दास ने कहा कि सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को रात 12 बजे से ही भगवान शिव को जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाती है। रात के 12 बजे साधु-संतों की पूजा के बाद मंदिर का कपाट खोल दिए जाते हैं। मेला समिति इसकी पूरी व्यवस्था करती है।
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मंदिर समिति के संरक्षक मिथिलेश सिंह ने कहा कि सावन माह में जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर की साफ सफाई कर दी गई है। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, मेला समिति के स्वयं सेवक इसका पूरा ख्याल रखते हैं।