गोरखपुर में दोपहर तीन बजे नार्मल टैक्सी स्टैंड से राप्ती नदी के घाट की तरफ सिर पर पूजा सामग्री और दउरा लेकर राप्ती नदी के घाटों पर जाते लोग। पीछे- पीछे ....... हे छठी मईया हर लीं बलैया, रिमिक झिमिक बोलेली छठी मईया,‘सुनिह अरज छठी मइया, बढ़े कुल-परिवार...’ ‘हे छठी मईया हर लीं बलैया हमार...’ ‘कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए...’, छठ गीत गाती महिलाएं।
ये नजारा छठ पर्व के तीसरे दिन राजघाट, तकिया घाट का रहा। जहां व्रती महिलाओं ने पानी में खड़े होकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही बेटे, पति की लंबी उम्र की मंगलकामना की। सोमवार को तड़के अरुणोदय पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं व्रत का पारण करेंगी। चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन दोपहर से ही राप्ती नदी के घाट पर भीड़ जुटना शुरू हो या था। शाम तक घाट खचाखच भर गया।
तमाम लोग बैंडबाजे के साथ घाटों तक पहुंचे। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने का सिलसिला करीब शाम पांच बजे से शुरू हुआ, जो कि शाम छह से साढ़े छह बजे तक चलता रहा। नदी के किनारे भीड़ ऐसी जुटी कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। जैसे ही अर्घ्य का समय आया घाटों पर छठ माता के जयकारे गूंजने लगे। शाम को अरुण देव की लालिमा निहारते हुए महिलाओं ने मां षष्ठी का आह्वान किया। परिवार के पुरुष सदस्यों और उनके रिश्तेदार बच्चों ने अर्घ्य दिया।