सर्किट हाउस के सामने फैली वाटर बॉडी की सूरत इस साल के आखिरी तक पूरी तरह बदल जाएगी। 6.50 एकड़ में फैली इस वाटर बॉडी को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण, पीपीपी मोड पर इसका सुंदरीकरण करा रहा है। इसके लिए मेसर्स पीवीएस इंटरप्राइजेज को मासिक 3.54 लाख रुपये के किराए पर 15 साल के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।
फर्म को 30 सितंबर 2023 तक वाटर बॉडी को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करना होगा। वर्क आर्डर की शर्तों के मुताबिक एक अक्तूबर से फर्म को हर माह जीडीए को 3.54 लाख रुपये किराया जमा करना होगा। यह करार 15 वर्ष के लिए किया गया है जिसे चार साल और बढ़ाया जा सकेगा।
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वाटर बॉडी की 50 फीसदी भूमि में पानी वाला क्षेत्र रहेगा, जिसमें फ्लोटिंग फाउंटेन एवं बोटिंग की सुविधा मिलेगी। बाकी 50 फीसदी हिस्से को अतिक्रमण से बचाने के लिए किनारे-किनारे बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। आकर्षक पौधे लगेंगे। रामगढ़ताल की तरफ पाथवे के पास वेडिंग जोन एवं पार्किग का विकास होगा।
इसमें 20 कार और 50 दो पहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। साथ ही फर्म, एम्युजमेंट पार्क, टिकट घर, बच्चों के खेलने के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करेगी। इन सुविधाओं और बोटिंग से फर्म आय अर्जित करेगी और जीडीए का किराया अदा करेगी। इसी तरह नौकायन के पास भी आधे हिस्से में वाटर बॉडी और बाकी में पार्क व मनोरंजन के अन्य संसाधन विकसित होंगे।
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि वाटर बॉडी को पर्यटन के एक बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। रामगढ़ताल से 50 मीटर के दायरे में कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। परियोजना के तहत तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी संचालकों को उठानी पड़ेगी।
धूल के गुबार से टहलने में दिक्कत
सिद्धार्थनगर निवासी एसपी मिश्रा ने कहा कि रामगढ़ताल शहर की पहचान है। लाखों की संख्या में लोग रोज यहां आते हैं। ऐसे में सुविधाओं पर ध्यान देने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। घूमने वालों के अलावा शहर की बड़ी आबादी रोजाना सुबह और शाम सेहत के लिहाज से टहलने आती है। मगर, इधर कुछ दिनों से भोर के वक्त से ही उड़ रहे धूल के गुबार से टहलने में बहुत दिक्कत हो रही है।
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बिना नाक-मुंह ढके नहीं चल सकते
आजाद नगर पूर्वी निवासी भगवान चन्द ने कहा कि रामगढ़ताल किनारे इतनी धूल उड़ रही है कि खांसते-खांसते लोगों का बुरा हाल हो जा रहा है। बिना नाक-मुंह ढके रामगढ़ताल रोड पर नहीं चल सकते हैं। वाटर बॉडी का मिट्टी संबंधी निर्माण कार्य पूरा होने तक लिंक और मुख्य सड़क पर हर रोज दो-तीन बार पानी का छिड़काव हो जाए तो भी लोगों को काफी राहत मिल जाएगी।
बुद्ध विहार पार्ट सी निवासी विनय ने कहा कि जीडीए से लेकर शासन तक ट्वीट किया मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही। कुछ दिन पहले तक सुबह नौ बजे के पहले ही टहलने वालों के लिए सुरक्षित एक लेन में गाड़ियों का प्रवेश हो जा रहा था। पुलिस के अधिकारियों से शिकायत के बाद यह समस्या अब खत्म हो गई है। मगर धूल उड़ने की नई समस्या खड़ी हो गई है। कई लोगों ने तो यहां टहलना ही बंद कर दिया है।
जिले की छवि भी खराब होगी
बुद्ध विहार पार्ट बी निवासी प्रतीक सिंह ने कहा कि ऐसा उपाय होना चाहिए कि वाटर बॉडी के विकास का कार्य भी प्रभावित न हो और रामगढ़ताल किनारे टहलने-घूमने आने वाले लाखों लोगों को भी दिक्कत न हो। स्थानीय लोगों के साथ ही साथ बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग रामगढ़ताल घूमने आते हैं। ऐसे में हर समय उड़ता धूल का गुबार देखकर हर कोई दुखी होगा। इससे जिले की छवि भी खराब होगी।
जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वाटर बॉडी को विकसित करने के साथ की कई और परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। सभी परियोजनाएं अपने तय समय पूरी हो जाएंगी। वाटर बॉडी के कार्य की वजह से धूल उड़ने की समस्या के बारे में जानकारी नहीं थी। जहां भी धूल उड़ रही है, वहां पानी का छिड़काव कराया जाएगा।