एनओसी के लिए पांच हजार रुपये का शुल्क निर्धारित है। एक हजार लीटर पर 1.20 रुपये का शुल्क शहरी क्षेत्र में लिया जाता है।भूगर्भ जल विभाग के पोर्टल पर एनओसी लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था है। इस पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भूगर्भ जल विभाग के पोर्टल पर मांगी गई जानकारी भरें। आवेदन के बाद संबंधित विभाग के कर्मचारी, आवेदक के संस्थान का भौतिक निरीक्षण करके एनओसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव सेहत पर भी
उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) कानून 2019 के तहत कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन की छूट है। लेकिन इस कानून की आड़ में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान व संस्थान भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पानी की बर्बादी से कई इलाकों में जल संकट भी खड़ा हो रहा है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है।
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पर्यावरणविद प्रो गोविंद पांडेय ने बताया कि राज्य में भूजल दोहन का सबसे बड़ा नुकसान है कि इससे पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है। मानक से अधिक आर्सेनिकयुक्त पानी लंबे समय तक पीने से आर्सेनिक किरैटोसिस होती है।
इसके अलावा त्वचा के कैंसर, मूत्राशय, फेफड़े और गुर्दे के कैंसर की आशंका रहती है। गैंगरीन, हाई ब्लड प्रेशर की समस्याएं भी हो सकती हैं। फ्लोराइड की अधिकता से डेंटल फ्लोरोसिस और स्केल्टल (बोन) फ्लोरोसिस जैसी बीमारियों की आशंका रहती है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर वैज्ञानिक सहायक राममिलन वर्मा ने कहा कि बिना एनओसी के लोग भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं। इस मामले में चिह्नित किए गए 122 होटल और बैंक्वेट हॉल संचालकों को नोटिस भेजा गया है। इसमें सभी को पंजीकरण कराने और एनओसी लेने का निर्देश दिया गया है।