राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के ओएसडी ने बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों से फीडबैक लिया। विभागाध्यक्षों ने बार-बार नोटिस मिलने, जवाब देने पर सुनवाई नहीं होने की भी बात कही है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जानी ने शनिवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में साढ़े आठ घंटे तक बैठक की। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों से फीडबैक लिया। निलंबित प्रो. कमलेश कुमार गुप्त सहित 17 विभागाध्यक्षों ने वर्तमान परिस्थितियों को तनावपूर्ण और दबाव वाला बताया है। बार-बार नोटिस मिलने और जवाब देने पर सुनवाई नहीं होने की भी बात कही है। ओएसडी अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपेंगे, इसके बाद कोई कार्रवाई होगी।
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राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी शुक्रवार देर रात गोरखपुर आए थे। शनिवार को वे कमेटी हॉल में एक-एक करके सबसे मिले। सबसे पहले कार्यवाहक कुलपति प्रो. अजय सिंह, कुलसचिव विशेश्वर प्रसाद, मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय से मामले की जानकारी ली। इसके बाद एक-एक करके संकायाध्यक्षों से बात की। फिर विभागाध्यक्षों का नंबर आया। सूत्रों के मुताबिक करीब 17 विभागाध्यक्षों ने वर्तमान परिस्थितियों को तनावपूर्ण और दबाव वाला बताया है। विभागाध्यक्षों ने बार-बार नोटिस मिलने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जवाब देने पर कोई सुनवाई नहीं होती है। प्रवेश व परीक्षा की नीति साफ नहीं है। आदेश बार-बार बदले जाते हैं। शिक्षकों और कुलपति के बीच विश्वसनीयता के अभाव की भी बात कही गई है। ओएसडी ने सभी की बातों को लिखा है।
शीतकालीन अवकाश के बाद कुलपति के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा सत्याग्रह करेंगे : प्रो. कमलेश
राज्यपाल के ओएसडी ने कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले हिंदी विभाग के प्रो. कमलेश गुप्त से दोपहर करीब ढाई बजे मुलाकात की। दोबारा शाम सवा छह से सवा सात बजे के बीच प्रो कमलेश को बुलाया। प्रो कमलेश ने एक-एक करके विश्वविद्यालय की समस्याएं गिनाई हैं। उन्होंने साफ कहा है कि शीतकालीन अवकाश के बाद कुलपति के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा सत्याग्रह करेंगे। शिक्षकों और कुलपति के बीच विश्वसनीयता का अभाव है। प्रो कमलेश ने कहा कि राज्यपाल के ओएसडी ने पूरी बात सुनी है। साथ ही हर समस्या के समाधान का भरोसा दिया है। रविवार से इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे।
प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो. अजेय गुप्ता, प्रो. विजय शंकर वर्मा, प्रो. विजय कुमार, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. अरविंद तिवारी, प्रो. चंद्रभूषण अंकुर ने भी ओएसडी से मुलाकात करके अपनी बात रखी। इन सबको प्रो कमलेश के समर्थन पर कारण बताओ नोटिस दिया गया था। उप्र आवासीय विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष प्रो. चितरंजन मिश्र व गोविवि शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसएन चतुर्वेदी ने भी ओएसडी से मुलाकात करके अपनी बात रखी है।
प्री पीएचडी छात्रों को दिया आश्वासन
डॉ. जानी से प्री पीएचडी सत्र 2019-20 के छात्रों ने मुलाकात की और वर्ष 2018 के पीएचडी अध्यादेश के मुताबिक परीक्षा कराने की मांग रखी। कहा है कि यदि कोई परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसके लिए दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित की जाए। इससे दोबारा पंजीकरण हो सकेगा। ओएसडी ने करीब 40 मिनट तक विद्यार्थियों की बात सुनी है।
छात्रनेताओं ने आठ सूत्री ज्ञापन सौंपा
छात्र नेताओं ने ओएसडी को आठ सूत्री ज्ञापन दिया है। इसमें छात्रसंघ चुनाव की बहाली, च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने, परिसर व छात्रावासों की व्यवस्था दुरुस्त करने, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय भुगतान व प्रो. कमलेश गुप्त का निलंबन वापस लेने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में शिव शंकर गोंड, गौरव वर्मा, भास्कर चौधरी, पवन, योगेश, प्रशांत, सतीश चंद्र, आर्य, ऋषि, मनीष, सुशांत व अरस्तु आदि शामिल रहे।
बास्केटबॉल टीम को वाराणसी जाने की अनुमति
गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर की बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने भी ओएसडी से मिलकर अपनी बात रखी है। उनका कहना था कि बीएचयू वाराणसी में 26 दिसंबर से प्रतियोगिता शुरू हो रही है। विश्वविद्यालय की टीम चयनित कर ली गई, लेकिन भेजा नहीं जा रहा है। ओएसडी ने तत्काल व्यवस्था करके खिलाड़ियों को वाराणसी भेजने का निर्देश दिया। छात्र व छात्राओं की टीमें फिलहाल अपने खर्चे से बीएचयू जाएंगी। वापसी के बाद खर्च की धनराशि विश्वविद्यालय प्रशासन से मिलेगी। इस मौके पर कविता यादव, श्रेया त्रिपाठी, मधु लेखा, स्नेहलता, निकिता थापा, अंचिता अंजनी, अभिषेक, विशाल, नीतीश, यशपाल, अंकित मौजूद रहे।