कुर्की का आदेश बीते सितंबर में जारी हुआ था। फिर भी सुधीर अपने आवास में रहता था। बीते सात दिसंबर को उसे जिला बदर किया गया, फिर जाकर प्रशासन ने कुर्की की कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई को अमलीजामा पहनाने में भी 10 दिन से ज्यादा का समय लग गया।
कार्रवाई में शुरू से ही हुई लापरवाही
माफिया सुधीर के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस व प्रशासन की लापरवाही सामने आ चुकी है। बीते सितंबर में जब कुर्की का आदेश जारी हुआ तो माफिया की जगह ट्रांसपोर्टर सुधीर सिंह के वाहनों को जब्त कर लिया गया। ट्रांसपोर्टर अब भी वाहनों को छुड़वाने के लिए भटक रहे हैं। उधर, जब यह कार्रवाई हुई, तब माफिया अपने वाहनों से घूम रहा था।
तहसीलदार न्यायिक सदर सुनीता गुप्ता ने कहा कि सितंबर में ही कुर्की का आदेश हुआ था। शुक्रवार को जब टीम कार्रवाई के लिए उसके आवास पर पहुंची तो सिर्फ सोफा व बेड बचा था। घर में परिवार के लोग थे, जो जरूरी सामान लेकर गए हैं। आवास को कुर्क कर दिया गया है। जल्द ही रिपोर्ट डीएम कोर्ट को उपलब्ध कराई जाएगी।