मोनू सिंह और साबिना से जालसाजी के मामले में पुलिस को तहरीर देने के बाद भी केस नहीं दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामला जालसाजी का होने की वजह से इसमें किसी अफसर का आदेश होगा तभी केस दर्ज किया जाएगा। हालांकि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का रवैया कहीं न कहीं से आरोपित को फायदा पहुंचा रहा है।
पीपीगंज थानाध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि कथित जालसाज युवक कानपुर में जालसाजी के मामले में जेल गया था। इस मामले की जांच की जा रही है। जालसाजी के मामले में केस दर्ज करने के लिए अफसर का आदेश होना जरूरी होता है।
यह कहता है कानून
दीवानी कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर शरण त्रिपाठी ने बताया कि कानून के हिसाब से पुलिस को तहरीर के आधार पर तत्काल सीआरपीसी की धारा 154 के तहत केस दर्ज करना चाहिए। इसमें किसी अफसर के आदेश की जरूरत नहीं होती है। कानून में प्रावधान है कि पीड़ित की तहरीर पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए और फिर उसकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।