जिला अस्पताल में मरीजों का सीटी स्कैन निशुल्क किया जाता है। वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इसके लिए सिर्फ 800 सौ रुपये चुकाने पड़ते हैं। वहीं, निजी केंद्रों में सीटी स्कैन काफी महंगा है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों के रेट भी अलग-अलग हैं। सिर का सीटी स्कैन कराने में मरीजों को 1,700 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि, चेस्ट के लिए 3,500, गले के लिए 3,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। सबसे अधिक रुपये पेट के सिटी स्कैन के लिए मरीजों को 5,500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ अंबुज ने कहा कि सीटी स्कैन मशीन खराब है। मशीन बनवाने के लिए तकनीशियन अयोध्या से आया था। बड़ी खराबी की वजह से समय लग रहा है। दो से तीन दिनों के अंदर मशीन सही हो जाएगी, इसके बाद मरीजों का सीटी स्कैन शुरू होगा।
एम्स में चार घंटे ठप रहा सर्वर, मरीज परेशान
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओपीडी में शुक्रवार को चार घंटे सर्वर ठप रहा। इसकी वजह से ओपीडी के पर्चा काउंटर पर मरीजों की लाइन लग गई। कुछ मरीजों ने विरोध किया तो मैनुअल पर्चा बनाना शुरू किया किया गया।
शुक्रवार को एम्स में दिखाने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। इसमें ज्यादातर बिना ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट वाले मरीज थे। सुबह आठ बजे तक पर्चा बनवाने वालों की लाइन लग गई। इस बीच आठ बजे के आसपास सर्वर डाउन होने से पर्चा बनना बंद हो गया।
इसकी जानकारी एम्स कर्मियों ने एडमिन ऑफिस में दी। प्रशासनिक अधिकारी भूपेश चन्द्र ओपीडी में पहुंचे और मरीजों को शांत कराते हुए मैनुअल पर्चा बनाने को कहा। एम्स के मीडिया प्रभारी डॉ. मुकुल सिंह ने बताया कि इंटरनेट में गड़बड़ी की वजह से सर्वर डाउन हो गया था। मरीजों की सुविधा को देखते हुए डॉक्टरों ने मैनुअल पर्चे पर उन्हें देखा।