योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके पहले यहां अच्छन बाबू के पुत्र शेखू नवाब आयोजन करते थे। योगगुरु योगानंद यहां अच्छन बाबू के मकान में ही किराए पर रहते थे। सोमवार सुबह लगभग आठ बजे घोष कंपनी चौराहे से परमहंस योगानंद की पालकी कंधे पर रखकर उनके अनुयायियों की ओर से प्रभातफेरी निकाली गई।
गुरुदेव को याद करते हुए उनके जयकारों के साथ अनुयायी मुफ्तीपुर स्थित परमहंस योगानंद की जन्मस्थली तक गए। प्रभातफेरी के दौरान अनुयायियों की ओर से मार्ग में फूलों की बारिश की जा रही थी। जन्मस्थली पर प्रभातफेरी के पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर परमहंस योगानंद का ध्यान लगाया गया, इसके बाद प्रभातफेरी ने अंदर प्रवेश किया।
योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती
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इसके बाद योगदा सत्संग सोसायटी व सेल्फ रिलाइजेशन फैलोशिप के सदस्य, अमेरिका से आए स्वामी विश्वानंद गिरि व रांची से आए योगदा सत्संग सोसायटी ऑफ इंडिया के सदस्य सौम्यानंद कार्यक्रम में शामिल हुए। साथ ही अमेरिका से आईं चार साध्वी भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।
पुष्पांजलि अर्पित कर की आरती, लगाया ध्यान
योगगुरु परमहंस योगानंद की पालकी को जन्मस्थली पर रखने के बाद अनुयायियों ने बारी-बारी से परमहंस योगानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर प्रणाम किया। चित्र के सामने धूप-दीप जलाकर आरती की गई। इसके बाद अनुयायियों ने ध्यान लगाया। बारी-बारी से सभी ने योगगुरु के चित्र के सामने माथा टेका।
योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा
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इसके बाद स्वामी विश्वानंद की ओर से कपूर और दीपक से आरती की गई। फूल के साथ वस्त्र भी अर्पण किए गए। शंखध्वनि से जन्मस्थली गुंजायमान हो गई। इसके बाद स्वामी विश्वानंद की ओर से अनुयायियों पर पुष्प बरसाए गए। वाद्य यंत्रों की धुन के साथ योगगुरु के भजन भी गाए गए। इस दौरान अनुयायियों की ओर से विचार भी रखे गए। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
शाम को भी लगाया ध्यान शिविर
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया व ध्यान मंडली के सदस्य सुधीर यादव ने बताया कि परमहंस योगानंद की जन्मस्थली पर सोमवार को अपराह्न लगभग तीन बजे के आसपास निर्माणाधीन जन्मस्थली पर एक घंटे का ध्यान किया गया। इस दौरान अनुयायियों ने परमहंस योगानंद को याद करते हुए उनका ध्यान लगाया। सुधीर यादव ने बताया कि जन्मस्थली पर ध्यान लगाकर जीवन धन्य हो गया है। हमारे रग-रग में योगानंद समाए हुए हैं।