दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोधार्थियों की मुश्किलें जल्द दूर हो जाएंगी। उनको थीसिस जमा करने के बाद निदेशक या सुपरवाइजर का चक्कर नहीं काटना होगा। इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ऑनलाइन अनुसंधान प्रबंधन पोर्टल जारी करने जा रहा है। शोधार्थी के ऑनलाइन थीसिस जमा करने पर दो माह में निदेशक को उसपर रिपोर्ट लगानी होगी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही दूसरे निदेशक के पास ट्रांसफर हो जाएगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय ने यह कदम परिसर में शोध व अनुसंधान को बढ़ावा देने और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण बनाने के लिए उठाया है। शोधार्थियों को पंजीकरण से लगायत थीसिस जमा करने तक काफी संघर्ष करना पड़ता है। समय-समय पर शोधार्थियों के शोषण की बात भी सामने आती रही है।
इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ऑनलाइन अनुसंधान प्रबंधन पोर्टल जारी करने जा रहा है। पोर्टल बन जाने से शोध के लिए पंजीकरण कराने, पीएचडी जमा करने और उपाधि प्राप्त करने तक सभी प्रक्रियाएं सरल होंगी। इसमें समय भी काफी कम लगेगा। पोर्टल तैयार होने के बाद हर पीएचडी विद्यार्थी को एक यूनीक यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिससे वह अपनी फाइल की स्थिति देख सकेंगे।
शोध संबंधी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विश्वविद्यालय ने पीएचडी अवार्ड से पहले थीसिस को साफ्ट काॅपी में ऑनलाइन जमा करने, विशेषज्ञों की ओर से ऑनलाइन मूल्यांकन और ऑनलाइन अंतिम साक्षात्कार की व्यवस्था पहले ही शुरू कर दी गई है।
पोर्टल शुरू होने के बाद शोधार्थी की सभी समस्याओं का समाधान तत्काल संभव हो सकेगा। इसमें थीसिस, विशेषज्ञों को भेजने के बाद ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था भी की गई है। विश्वविद्यालय की कोशिश है कि पोर्टल के जरिए थीसिस का मूल्यांकन अधिकतम दो महीने में करा लिया जाए।
विदेश के परीक्षकों का प्रस्ताव होगा आसान
नए पीएचडी अध्यादेश में पहली बार विदेश के परीक्षकों को प्रस्तावित करने का भी प्रावधान किया गया है, जो पोर्टल के कारण संभव हो सकेगा। विदेश से परीक्षक आमंत्रित करने की व्यवस्था पहले भी रही है, लेकिन ऑफलाइन यह संभव नहीं हो पाता। अब विदेश के परीक्षक को आमंत्रित करने मेें भी उतना ही समय लगेगा, जितना देश के।
पोर्टल पर ये जानकारियां रहेंगी उपलब्ध
पोर्टल पर शोधार्थी की फोटो सहित पूरी जानकारी, अनुमोदित थीसिस शीर्षक, पर्यवेक्षक व सह-पर्यवेक्षक की जानकारी, पंजीकरण की तारीख, सेमेस्टर शुल्क वितरण, छमाही प्रगति रिपोर्ट सहित हर पंजीकृत छात्र का पूरा विवरण मौजूद रहेगा। इससे शोधार्थी ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन को भी आधिकारिक कार्यवाही में आसानी होगी।
डीडीयू कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि शोधार्थियों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय अनुसंधान प्रबंधन पोर्टल तैयार किया रहा है। इसके शुरू हो जाने से शोधार्थियों को पंजीकरण से लगायत शोध प्रस्तुति की प्रक्रिया पूरी करने में आसानी होगी। ऐसे में वह अपना पूरा फोकस शोध अध्ययन पर रख सकेगा। इससे शोध की गुणवत्ता बढ़ेगी। शोधार्थी के ऑनलाइन थीसिस के जमा करने पर निदेशक को दो माह में मूल्यांकन करना होगा।