गोरखपुर विश्वविद्यालय स्वतंत्रता मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाला पहला विश्वविद्यालय है। इसकी नींव 1 मई 1950 को पड़ी, तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने इसका शिलान्यास किया। अगस्त 1956 में विधानसभा से गोरखपुर विश्वविद्यालय अधिनियम पारित हुआ। 11 अप्रैल 1957 को बीएन झा पहले कुलपति बने।
विश्वविद्यालय की स्थापना में गोरक्षपीठ का बहुत बड़ा योगदान है। महंत दिग्विजय नाथ ने विश्वविद्यालय के लिए महाराणा प्रताप महाविद्यालय और महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय के परिसर को दे दिया था। 1197 में इसका नाम दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय रख दिया गया।