इस बीच कैंट पुलिस द्वारा केस में एफआर लगा दिया था। लेकिन उसके बाद भी गोविवि प्रशासन ने उन शोधार्थियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली। कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने इसे प्राथमिकता में लेते हुए 10 अक्टूबर को अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस ले लिया। पिछले सप्ताह परीक्षा समिति की बैठक में प्री पीएचडी छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित करने पर चर्चा हुई। जिसमें जल्द परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्णय लिया गया।
कोरोना महामारी और गोविवि की लापरवाही रही जिम्मेदार
इस मामले में कोरोना महामारी के कारण छात्रों का छह महीने होने वाली परीक्षा पूरी नहीं हो सकी थी। बाद में गोविवि प्रशासन इसे लेकर पूरी तरह लापरवाह दिखा। इसे लेकर छात्रों को करीब एक महीने तक लगातार अनशन करना पड़ा था। प्रदर्शन करने वाले 17 छात्रों पर केस दर्ज कराया गया। छात्रों की जायज मांगों पर विवि प्रशासन ने उनकी प्री पीएचडी की परीक्षा तो कराई लेकिन उसके प्रश्न पत्र पर सवाल खड़े हो गए।
गोविवि कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि सत्र 2019-20 के प्री पीएचडी के कुछ छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हो सका था। परीक्षा समिति की बैठक में जल्द उनका परीक्षा परिणाम घोषित करने और उनके बैच के निर्धारण पर निर्णय लिया गया है।