गोरखपुर। पहले से ही पूरे एक सत्र की देरी से जूझ रहे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सत्र 2023-24 के पीएचडी के शोधार्थियों को प्रशासनिक लापरवाही के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। प्री पीएचडी का कोर्स वर्क छह महीने में पूरा हो जाता है। स्थिति यह है कि प्री पीएचडी का परिणाम भी घोषित नहीं किया जा सका है।
डीडीयू में कोरोना महामारी के समय से ही पीएचडी का सत्र देरी से चल रहा है। सत्र 2023-24 की पीएचडी के लिए शोध पात्रता परीक्षा 29-30 जुलाई 2024 को हुई थी। उसके बाद अगस्त 2024 में पीएचडी में प्रवेश दिया गया था। उस हिसाब से फरवरी 2025 तक प्री पीएचडी परीक्षा के परिणाम जारी हो जाने चाहिए थे लेकिन अब तक नहीं हो सका। पीएचडी का पूरा कोर्स प्राय: तीन वर्ष के लिए होता है। उस तरह से देखा जाए तो यदि सत्र की देरी नहीं चल रही तो जून 2026 तक शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिल जाती।
परिणाम नहीं आने के कारण उधेड़बुन में शोधार्थी
पीएचडी की थिसिस कंप्लीट करने से पहले प्री पीएचडी उत्तीर्ण होना जरूरी है। प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर में विभागवार संपन्न हुई थी। इसके परिणाम घोषित करने में कुछ दिन का समय लगता है लेकिन अब तक घोषित नहीं किया जा सका। इससे शोधार्थी उधेड़बुन में हैं।
सत्र 2024-25 के प्री पीएचडी की नहीं हुई परीक्षा
सत्र 2024-25 सत्र की शोध पात्रता परीक्षा मार्च 2025 में हुई थी। मार्च में ही पीएचडी में प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। छह महीने में उनका भी प्री पीएचडी कोर्स वर्क पूरा नहीं हो पाया। स्थिति यह है कि अब तक प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा भी नहीं हो सकी है।
पीएचडी में प्रवेश के लिए आज आवेदन का अंतिम मौका
सत्र 2025-26 की पीएचडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 फरवरी निर्धारित है। शोध पात्रता परीक्षा (रेट) का आयोजन मार्च के दूसरे हफ्ते में प्रस्तावित है।
इस संबंध में शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दिनेश यादव ने बताया कि सत्र 2023-24 की प्री पीएचडी के सभी परिणाम जल्द घाेषित कर दिए जाएंगे। इसे लेकर तैयारी की जा रही है। उसके बाद सत्र 2024-25 की प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा कराई जाएगी।