ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के बाद से ही करीब सभी पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत सीट वृद्धि की गई थी। तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने उस व्यवस्था को रद करने का फरमान जारी कर दिया था। ईडब्ल्यूएस कोटे की 10 प्रतिशत सीटें तो यथावत रखी गईं लेकिन उसके बाद 10 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश नीलामी के जरिये देने का निर्णय लिया गया था। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलित थे।
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इन विषयों में प्रवेश का रास्ता साफ
इस निर्णय को वर्तमान सत्र में एकल विषय कार्यक्रम जैसे स्नातक में विधि तथा वाणिज्य एवं परास्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में लागू किया जाएगा। अब विश्वविद्यालय इन पाठ्यक्रमों में इस सत्र में नियमित शुल्क पर दाखिला लेगा। बीए और बीएससी में इस सत्र में इसे लागू कर पाना संभव नहीं है। सूत्रों के मुताबिक अगले सत्र 2024-25 से फिर आरक्षण का अनुपात सही कर दिया जाएगा।
शुल्क वृद्धि को लेकर एबीवीपी ने चलाया था आंदोलन
गोविवि में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रम के साथ पीएचडी में शुल्क वृद्धि के विरोध में एबीवीपी ने आंदोलन छेड़ रखा था। बीते 21 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान आंदोलन उग्र हो गया था। तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह और कुलसचिव प्रो. अजय सिंह से छात्रों का हाथापाई हो गई थी। इसपर 22 एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कैंट पुलिस ने तत्कालीन नियंता डॉ. सत्यपाल सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर आठ को जेल भेजा था।