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गोरखपुर विश्वविद्यालय: पुराने छात्रों को नहीं देना होगा बढ़ा शुल्क, 25 फीसदी सीट वृद्धि पर लगी मुहर

Sat, 30 Sep 2023 04:57 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के बाद से ही करीब सभी पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत सीट वृद्धि की गई थी। तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने उस व्यवस्था को रद करने का फरमान जारी कर दिया था। ईडब्ल्यूएस कोटे की 10 प्रतिशत सीटें तो यथावत रखी गईं लेकिन उसके बाद 10 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश नीलामी के जरिये देने का निर्णय लिया गया था। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलित थे।
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DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले पुराने छात्रों को अब बढ़ा शुल्क नहीं देना होगा। बढ़ा शुल्क सिर्फ नवप्रवेशी छात्रों से ही लिया जाएगा।

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इसके अलावा 10 फीसदी (पेड) सीटों के नीलामी के निर्णय को भी वापस लेते हुए उन सीटों पर सामान्य शुल्क पर ही प्रवेश लेने की सहमति बनी है। साथ ही स्नातक व परास्नातक के एकल विषय में 25 फीसदी सीट वृद्धि का भी निर्णय लिया गया है। वित्त समिति की स्वीकृति पर कार्य परिषद ने मुहर लगा दी है।

गोविवि में शुक्रवार को वित्त समिति और उसके बाद कार्य परिषद की बैठक कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में हुई। छात्रहित को ध्यान में रखते हुए स्नातक और परास्नातक स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में तीसरे, पांचवें, सातवें और नौवें सेमेस्टर तथा पीएचडी के विद्यार्थियों के शुल्क वृद्धि को वापस लेने के लिए वित्त समिति ने अपनी स्वीकृति प्रदान की।
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इस निर्णय पर कार्य परिषद में अपनी मुहर लगा दी। निर्णय लिया कि जिन विद्यार्थियों ने बढ़ी फीस जमा की है, उसका समायोजन अगली बार कर लिया जाएगा।
 

बिगड़ गया था आरक्षण का अनुपात

ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के बाद से ही करीब सभी पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत सीट वृद्धि की गई थी। तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने उस व्यवस्था को रद करने का फरमान जारी कर दिया था। ईडब्ल्यूएस कोटे की 10 प्रतिशत सीटें तो यथावत रखी गईं लेकिन उसके बाद 10 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश नीलामी के जरिये देने का निर्णय लिया गया था। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलित थे।

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इन विषयों में प्रवेश का रास्ता साफ
इस निर्णय को वर्तमान सत्र में एकल विषय कार्यक्रम जैसे स्नातक में विधि तथा वाणिज्य एवं परास्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में लागू किया जाएगा। अब विश्वविद्यालय इन पाठ्यक्रमों में इस सत्र में नियमित शुल्क पर दाखिला लेगा। बीए और बीएससी में इस सत्र में इसे लागू कर पाना संभव नहीं है। सूत्रों के मुताबिक अगले सत्र 2024-25 से फिर आरक्षण का अनुपात सही कर दिया जाएगा।
 

नए छात्रावासों के शुल्क पर चर्चा

तीन नए छात्रावासों को भी जल्द ही छात्र-छात्राओं के लिए खोला जा सकता है। इसके लिए शुल्क निर्धारण पर चर्चा की गई। बताते हैं कि शुल्क स्ववित्तपोषित आधार पर लिया जा सकता है, जिससे उनके रखरखाव का खर्च भी निकल सके।

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डॉ. वेंकटेश के मामले पर भी चर्चा
रसायन विज्ञान में वर्ष 2018 में हुई नियुक्ति के मामले में भी कार्य परिषद ने निर्णय लिया है। बताते हैं कि कार्य परिषद ने हाईकोर्ट के निर्णय के आलोक में डॉ. वेंकटेश पांडेय के ज्वाइनिंग का निर्णय लिया है। दरअसल, वर्ष 2018 में हुई नियुक्ति में डॉ. वेंकटेश को वेटिंग में प्रथम स्थान पर रखा गया था। जिन दो शिक्षकों की नियुक्ति हुई, उन्होंने यहां ज्वाइन नहीं किया। डॉ. वेंकटेश ने दावा किया। सुनवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी।

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शुल्क वृद्धि को लेकर एबीवीपी ने चलाया था आंदोलन
गोविवि में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रम के साथ पीएचडी में शुल्क वृद्धि के विरोध में एबीवीपी ने आंदोलन छेड़ रखा था। बीते 21 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान आंदोलन उग्र हो गया था। तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह और कुलसचिव प्रो. अजय सिंह से छात्रों का हाथापाई हो गई थी। इसपर 22 एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कैंट पुलिस ने तत्कालीन नियंता डॉ. सत्यपाल सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर आठ को जेल भेजा था।
 
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