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गोरखपुर विश्वविद्यालय: DDU में हैप्पीनेस सेंटर की तर्ज पर खुलेगा स्नेह केंद्र, लगी मुहर

Fri, 02 Feb 2024 03:08 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

स्नेह द्वारा आईसीएमआर, आईसीएसएसआर, डीएसटी, आईसीपीआर आदि विभिन्न फंडिंग एजेंसियों से प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव दिए जाएंगे। यूजी और पीजी कार्यक्रमों में नए वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है।
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बैठक में बोलती कुलपति प्रो.पूनम टंडन व अन्य। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक हुई। इसमें हैप्पीनेस लैब्स की तर्ज पर स्नेह केंद्र खोले जाने का मंजूरी मिल गई। तीसरी बार निलंबित चल रहे प्रो. कमलेश गुप्त भी बहाल कर दिए गए हैं। बैठक में 60 से अधिक मुद्दों पर कार्य परिषद की मुहर लगने के साथ ही पिछली कार्यवाही की भी संपुष्टि की गई।

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बैठक में कार्य परिषद ने मनोविज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तावित स्नेह केंद्र (स्पेस टू नर्चर, एनर्जाइज एंड हील) की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की। कुलपति की यह अनूठी पहल है। स्नेह केंद्र मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य स्टेक होल्डर्स को व्यक्तिगत रूप से और कार्यस्थल पर स्वस्थ और प्रभावी जीवन शैली बनाए रखने में मदद करेगा।

हैप्पीनेस लैब्स की तरह स्नेह केंद्र की स्थापना का उद्देश्य समग्र प्रसन्नता व कल्याण, अनुसंधान तथा आउटरीच गतिविधियां हैं। यह केंद्र लोगों के साथ व्यवहार करने, मानव व्यवहार पैटर्न को समझने, प्रेरणा देने जैसे बुनियादी गुणों को विकसित करने में मदद करेगा। यह केंद्र जनसंख्या की विविधता के अनुसार शांति और प्रसन्नता का अध्ययन करने के साथ-साथ विभिन्न उपकरणों के डिजाइन, मान्यता और पेटेंट में मदद करेगा।
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वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम शुरू करेगा स्नेह
स्नेह द्वारा आईसीएमआर, आईसीएसएसआर, डीएसटी, आईसीपीआर आदि विभिन्न फंडिंग एजेंसियों से प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव दिए जाएंगे। यूजी और पीजी कार्यक्रमों में नए वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है।

ग्रीन कक्ष के साथ होगा स्पीक-अप कॉर्नर
स्नेह केंद्र में ध्यान और जागरूकता के लिए आध्यात्मिक उपचार कक्ष, लर्निंग, मेमोरी एंड कंसंट्रेशन कक्ष, क्रोध प्रबंधन कक्ष, बायोफीडबैक कक्ष, प्रकृति को महसूस करने के लिए ग्रीन कक्ष के साथ साथ स्पीक-अप कॉर्नर भी होगा।

 
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दो साल में 17 महीने झेला निलंबन, कार्य परिषद ने किया बहाल
हाईकोर्ट ने बीते 21 नवंबर को हिन्दी विभाग के निलंबित आचार्य प्रो. कमलेश गुप्त के निलंबन और सभी आरोपों को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में उन्हें कार्य परिषद ने बहाल कर दिया। इस संबंध में देर शाम कुलसचिव कार्यालय से बहाली का आदेश भी जारी हो गया। प्रो. कमलेश पिछले दो वर्षों में तीन बार निलंबित हुए। कुल 17 महीने से अधिक समय तक उन्होंने निलंबन झेला। प्रो. कमलेश ने बहाली का आदेश पत्र लगाते हुए ‘फेसबुक’ पर लिखा है, यह एक शिक्षक की बहाली मात्र नहीं है। यह हमारे विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली है। यह तानाशाही-मनोवृत्ति पर लोकतांत्रिक प्रवृत्ति की जीत है।

अनुराग द्विवेदी समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष
कार्यपरिषद से वरिष्ठता जारी होने के बाद प्रो. अनुराग द्विवेदी को समाजशास्त्र का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। इस संबंध में बृहस्पतिवार की शाम कुलसचिव ने आदेश जारी कर दिया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्य परिषद में उनकी अर्हता निर्धारण की रिपोर्ट दी गई।
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