गोरखपुर विश्वविद्यालय के लेखाधिकारी और प्रधान सहायक हटाए गए
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजभवन के निर्देश पर वित्तीय अनियमितताओं की जांच के पहले ही लेखाधिकारी पीएन सिंह और कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं प्रधान सहायक महेंद्र नाथ सिंह को हटा दिया गया है।
राजभवन ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनकी जगह दूसरे कर्मियों की तैनाती भी कर दी है। जांच प्रभावित नहीं होने पाए, इसलिए इन्हें हटाया गया है। अभी कुछ और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश ने सोमवार को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए हैं। लेखाधिकारी पीएन सिंह को लाइब्रेरी से संबद्ध किया गया है जबकि प्रधान सहायक महेंद्र नाथ सिंह को विधि संकाय में भेजा गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि दोनों लोग स्थानांतरित विभाग में तत्काल कार्यभार ग्रहण करें। लेखाधिकारी का कार्यभार सहायक कुलसचिव रवि निषाद और प्रधान सहायक का कार्यभार अनिल कुमार चौधरी देखेंगे। दोनों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कुलसचिव ने बताया कि राजभवन में शिकायत हुई है। कुलपति के निर्देश पर कार्रवाई की गई है।
तीन मामलों में हुई है शिकायत
विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता की तीन शिकायतें हुई हैं। पहली शिकायत ठेकेदार पीयूष कुमार सिंह ने की थी। कुलपति और राजभवन को भेजे गए शिकायती पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी फर्म ने छात्रावास में काम कराया और दूसरी फर्म को भुगतान कर दिया गया। राजभवन ने इस मामले पर संज्ञान लिया।
राज्यपाल के सचिव ने चार नवंबर को कुलपति को पत्र भेजकर मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं दूसरी शिकायत प्रशासनिक भवन में कैंटीन मरम्मत के नाम पर गड़बड़ी की भी हुई है। तीसरी शिकायत संविदा कर्मचारियों के ईपीएफ घोटाले की है। आरोप है कि सेवा प्रदाता फर्म को पांच साल से बगैर टेंडर के ही अनुबंध दिया जा रहा है। फर्म पर संविदा कर्मचारियों के ईपीएफ में गड़बड़ी का आरोप है।