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गोरखपुर विश्वविद्यालय: वेबकास्टिंग के जरिए होगी परीक्षा केंद्रों की निगरानी

Sun, 05 Jan 2020 11:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला
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विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में परीक्षार्थियों पर इस बार ऑनलाइन वीडियो के जरिए निगरानी रखी जाएगी। परीक्षा केंद्रों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को वेब कास्टिंग के लिए इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। इन कैमरों में वायस रिकॉर्डर भी लगाया जाएगा। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी किसी भी महाविद्यालय के किसी भी परीक्षा कक्ष की निगरानी अपने कमरे में बैठे-बैठे ही कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रत्येक जिले में परीक्षा के केंद्रों के पर्यवेक्षण के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी को नामित करेेंगे।
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विश्वविद्यालय और इससे जुड़े महाविद्यालय प्रशासन वेबकास्टिंग के लिए सीसीटीवी कैमरों को राउटर से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षाओं के लिए अभी तक परीक्षा कक्ष की निगरानी में सीसीटीवी कैमरे तो लगाए जाते थे लेकिन इनकी वीडियो संबंधित विश्वविद्यालय या महाविद्यालय के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) में ही रह जाती थी। इस बार शासन ने इन सीसीटीवी कैमरों को वेब कास्टिंग तकनीक से जोड़ने का फैसला किया है।

इसके तहत प्रत्येक परीक्षा कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे वायस रिकॉर्डर और राउटर (इंटरनेट के जरिए डेटा आदान प्रदान करने वाला उपकरण) से जोड़े जाएंगे। प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन आर रमेश कुमार की ओर से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है।
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यह हैं मुख्य निर्देश

-परीक्षा केंद्र के लिए चुने गए महाविद्यालयों केे मुख्य द्वार सहित प्रत्येक परीक्षा कक्ष में वायस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
- इन सीसीटीवी कैमरों को राउटर डिवाइस से जोड़ा जाएगा ताकि लाइव वीडियो वेब कास्टिंग हो सके।
-प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। यदि कमरे का आकार बड़ा है तो इस तरह कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और इस तरह लगाए जाएंगे कि हर जगह की निगरानी हो सके।

माह के अंत तक परीक्षा केंद्रों का होगा चयन
25 फरवरी से शुरू होने वाली विश्वविद्यालय परीक्षाओं के लिए जनवरी के अंत तक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण कर लिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों के चयन में पहले राजकीय महाविद्यालय फिर अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों का चयन किया जाएगा। इसके बाद भी परीक्षा केंद्र की जरूरत पड़ी तो स्व वित्त पोषित महाविद्यालय को चुना जाएगा। पिछले वर्ष 270 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
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