करीब दो सौ साल पुरानी संस्कृति और सभ्यता की गवाह रह चुकी गोरखपुर कोषागार की पुरानी इमारत के डबल लॉक में अभी भी बहुत से पुराने बेशकीमती सामान सुरक्षित रखे हैं। इन्हीं में शामिल चार दर्जन से अधिक ऐसी चाभियां, जिन्हें दशकों से अपने तालों का इंतजार है। अलग-अलग आकार की इन चाभियों में से कई पर तो जंग भी लग चुकी है।
दरअसल समय दर समय बहुत से विभाग या उनके अलग-अलग कार्यालय बंद होते गए। इन विभागों-दफ्तरों में ताला लगने के बाद उनकी चाभियां कोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित रख दी गईं। इसके बाद उनमें से कई चाभियों के बारे में पलटकर किसी ने पूछा ही नहीं। कोषागार कार्यालय की तरफ से कुछ विभागों से पत्राचार भी हुए मगर उसका भी कोई सार्थक जवाब नहीं आया।
उप्र कोषागार कर्मचारी संघ के प्रांतीय अपर महामंत्री अश्वनी श्रीवास्तव बताते हैं कि गोरखपुर कोषागार की स्थापना 1789 में हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे अलग-अलग इमारतें वजूद में आईं। अंग्रेजी शासन काल में बैंक तो होते नहीं थे लिहाजा उनका पूरा खजाना भी इसी कोषागार के डबल लॉक में रखा जाता था।