गोरखपुर के परंपरागत टेराकोटा शिल्पकारी को जियोग्रैफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिल चुका है। वहीं यह उत्तर प्रदेश सरकार की योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ में भी शामिल है। गोरखपुर के टेराकोटा को जीआई टैग दिलवाने में वाराणसी संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन ने काफी मदद की।
संस्था से जुड़े डॉक्टर रजनीकांत ने बताया कि टेराकोटा की मूर्तियां बनाने का काम गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलहरिया, भरवलिया, अमवां, बुढ्ढाडीह, एकला, बेलवा रायपुर और चरगांवां इलाकों में होता है। ये कलाकार इन मूर्तियों को केवल हाथ से बनाते हैं और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं। टेराकोटा की मूर्तियां बनाने वाले कलाकार आमतौर पर हाथी, घोड़े, ऊंट और बकरी जैसे जानवरों की ही मूर्तियां बनाते हैं। वहीं अब कुछ कलाकार बुद्ध और गणेश के साथ-साथ कुछ सजावटी सामान भी बनाने लगे हैं।