छात्रा नेता विशाल सिंह हत्याकांड में उसके दोस्त और इस मामले में आरोपी राहुल अली व उसके परिवार की नागरिकता पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि गांव में उसके घर और जमीन के कोई कागजात नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कबाड़ बीनने वाला यह परिवार कब और कहां से आकर यहां बस गया, इस बात की किसी की जानकारी में नहीं है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बांग्लादेश से आकर यहां परिवार अवैध तरीके से बस गया है, फिलहाल यह जांच का विषय है।
विशाल हत्याकांड में धरपकड़ शुरू होने के बाद से कौड़ीराम में रानीपुर गांव का निवासी राहुल अली और उसके परिजन घर पर ताला डालकर फरार हो गए, हालांकि दूसरे आरोपी राहुल अली को पुलिस ने शनिवार की तड़के सुबह नगवा गांव के सीकट बांध के समीप गिरफ्तार कर लिया। पुलिस मुठभेड़ में राहुली अली के दाहिने पैर में गोली लगी है। पुलिस हत्या के एक आरोपी को पहले गिरफ्तार कर चुकी है। दो अन्य को गिरफ्तार होना अब बाकी है।
अमर उजाला की पड़ताल में पता लगा कि उसके टीन टप्पर वाले घर में वे कब आकर रहने लगे, इसकी भनक भी किसी को नहीं है। हत्याकांड के बाद से उन्हें संदिग्ध मानकर गांव में चर्चाएं फैलीं, तब से सबकी नजर उनके घर पर जम गईं। उनके बांग्लादेशी होने की चर्चाएं भी छिड़ी हैं। छानबीन भी शुरू हो गई।सरकारी रिकॉर्ड में राहुल अली के पिता वाहिद अली के नाम से रानीपुर मौजे में कोई जमीन नहीं मिली है।
जब बांसगांव ब्लॉक पर विकास खंड भिटहा ग्रामसभा के रानीपुर मौजे के परिवार रजिस्टर की जांच कराई गई तो वहां राहुल अली के पिता वाहिद अली या उनके परिवार के नाम का कोई भी कागजात नहीं मिला।
जिसने बसाया, उसको ही इनके बारे में कुछ नहीं पता
जानकारी के मुताबिक, कौड़ीराम में चर्चित मोथा सेठ हुआ करते थे। उनकी कौड़ीराम में बहुत सारी जमीन थी, लेकिन बेटे ना होने के कारण उनकी बेटी-दामाद वारिस हैं। बहुत तलाशने पर मोथा सेठ के दामाद नसरुद्दीन ने बताया कि कुछ जानकारी मिली है। पता लगा है कि वर्ष 2001 के करीब राहुल अली का पिता वाहिद अली कौड़ीराम आया।
यहां सड़क किनारे झोपड़ी डालकर वह परिवार के साथ रहने लगा। दिनभर कस्बे में कबाड़ बीनने का काम करता था। नसरुद्दीन ने बताया कि उनके पटीदार ने वाहिद अली को खाली जमीन में बसाया था। यह परिवार कहां से आया था, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।