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गोरखपुर : दुकानें बंद रहीं लेकिन फिर भी जमा करने होंगे ढाई करोड़ रुपये

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गोरखपुर : दुकानें बंद रहीं लेकिन फिर भी जमा करने होंगे ढाई करोड़ रुपये
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गोरखपुर। लॉकडाउन के दौरान जोन में 43 हजार दुकानें छह महीने तक बंद रहीं। अब उन्हें फिक्स चार्ज के रूप में ढाई करोड़ रुपये बिजली निगम के खाते में जमा कराने होंगे। वाणिज्यिक श्रेणी का कनेक्शन होने की वजह से दुकानदारों को फिक्स चार्ज देना पड़ेगा।
व्यापारी इसी फिक्स चार्ज को माफ करने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन अभी राहत नहीं मिल सकी है। हालांकि निगम ने कोविड एकमुश्त समाधान योजना विभिन्न शर्तों के साथ लागू कर व्यापारियों को राहत देने का प्रयास किया है।
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कोरोना लॉकडाउन 23 मार्च से पूरी तरह लग गया था। इस अवधि में मेडिकल और राशन की दुकानों को छोड़कर अन्य प्रकार की दुकानें नहीं खुल रहीं थीं। प्रशासन ने सख्ती के साथ सभी प्रकार की दुकानों-व्यापार को बंद करवा दिया था। पिछले एक से डेढ़ महीने बाद स्थिति थोड़ी सामान्य होने पर दुकानों को खोलना शुरू किया गया। जिसके बाद अब धीरे-धीरे अब व्यापारियों के पास फिक्स चार्ज वाले बिल आने लगे हैं। बिजली निगम कार्यालय जाने पर पता चला कि उन्हें फिक्स चार्ज तो जमा ही करना पड़ेगा। सुनकर व्यापारियों के होश उड़े हैं। व्यापारियों ने कहा कि लॉकडाउन के वक्त प्रशासन के सहयोग में सुरक्षा को देखते हुए दुकानें बंद रखी गईं। ऐसे में उनके पास फिक्स चार्ज देने के लिए बिल क्यों भेजा जा रहा है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि पूरे लॉकडाउन में बिजली सेवा निर्बाध दी गई। ऐसे में बिजली खरीद से लेकर अन्य खर्चे उपभोक्ताओं के द्वार जमा कराने पर ही तो आगे भी बेहतर बिजली व्यवस्था सुचारू ढंग से चला सकेंगे। सरकार ने पहले से ही व्यापारियों, उद्यामियों को लॉकडाउन के दौरान बिजली उपभोग के बिलों में राहत देने का काम किया है।
ब्याज में मिल रही 100 प्रतिशत छूट
मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने बताया कि इन उपभोक्ताओं को छह महीने के बिल में ब्याज का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने पुराने बकाए के बिल और लॉकडाउन के दौरान लेट फीस वाले ब्याज में छूट दे दी है। हालांकि उन्हें फिक्स चार्ज देना पड़ेगा।
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क्या होता है फिक्स चार्ज
बिजली निगम के वाणिज्यिक श्रेणी वाले उपभोक्ताओं को प्रति किलोवाट की दर से भुगतान करना होता है। इसे छह महीने में बांटा जाता है। ठंड के समय अक्टूबर से मार्च तक प्रति माह प्रति किलोवाट 475 रुपये फिक्स चार्ज के रूप में लिए जाते हैं। अप्रैल से सितंबर तक फिक्स चार्ज छह सौ रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह हो जाता है। इस न्यूनतम खपत में सरचार्ज जुड़ा होता है।
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