इस रूट पर 12.70 किलोमीटर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज, मुगलहा, खजांची बाजार, बशारतपुर, अशोक नगर, वैष्णोनगर, असुरन चौक, धर्मशाला, गोलघर, कचहरी चौराहा, बेतियाहाता और ट्रांसपोर्टनगर नगर होते हुए नौसड़ तक 13 स्टेशन बनेंगे। जिस रूट पर मेट्रो ट्रेन चलनी है, उस पर फोरलेन का काम पूरा हो चुका है। फोरलेन के बीच में ही मेट्रो के लिए पिलर बनाए जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक, करीब 27 किमी लंबे मेट्रो रूट पर 27 स्टेशनों के साथ दो एलिवेटेड लाइनें बनेंगी। इस परियोजना के वर्ष 2024 तक पूरा होने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन, अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। इसका संचालन शुरू होने से सड़क पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
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सेवानिवृत्त मुख्य परिचालन प्रबंधक रेलवे राकेश त्रिपाठी ने कहा कि गोरखपुर शहर का विस्तार चारों तरफ तेजी से हो रहा है। इसलिए अगले 20 से 25 साल तक होने वाले विकास के मुताबिक लाइट मेट्रो का डिजाइन किया जाना जरूरी है। परियोजना शुरू होने के बाद इसमें कोई बदलाव संभव नहीं हो सकेगा। जैसे रेलवे की कोई योजना बनती है तो वह दूरगामी परिणाम के तहत होती है। अभी मौका है, इसलिए संबंधित विभागों को इस पर ध्यान देना चाहिए। यह ख्याल रखा जाना चाहिए कि अब शहर का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। लोगों का आवागमन शहर के बाहरी हिस्से में ज्यादा है, इसलिए मेरा मानना है कि मेट्रो रेल सिर्फ शहर में न चलाकर बाहरी हिस्से में भी दौड़ाई जाए। इससे लोगो को कम पैसे और कम समय में आने की सुविधा मिलेगी।
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सिविल इंजीनियर और आर्किट्रेक्ट सतीश सिंह ने कहा कि वर्तमान में नगर निगम की इलेक्ट्रिक बसें जहां तक चल रही हैं, कम से कम वहां तक इस परियोजना का विस्तार किया जाए। पीपीगंज, पिपराइच, सहजनवां, सोनबरसा और मुंडेरा बाजार तक शहर का दायरा बढ़ चुका है। मेट्रो रेल को अब मोतीराम अड्डा से आगे और नौसड़ से बढ़ाकर सहजनवां तक किए जाने की जरूरत है। तभी इसकी उपयोगिता होगी और लोगों को ज्यादा सुविधा होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि लाइट मेट्रो परियोजना के संबंध में डीपीआर शासन में लंबित है। इस संंबंध में जैसे ही कोई निर्देश मिलेगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। मेट्रो रेल परियोजना से शहर के विकास को गति मिलेगी।