इसके बाद शाम करीब पांच बजे राप्ती कांप्लेक्स पहुंचे। वहां चार दुकानों की लिस्ट कर्मचारी के पास थी। सबसे पहले जिस दुकान पर पहुंचा तो दुकानदार ने विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिया। टीम के कर्मचारी ने अपना नाम शमसुल बताया। आसपास के दुकानदार जुट गए और कर्मचारी को घेर लिया। दुकानदारों ने उससे परिचय पत्र मांगा। इसकी फोटो कॉपी अपने पास सुरक्षित रखी। हिंदी बाजार के एक हॉलमार्क सेंटर की दुकान पर पहचान पत्र का फोटो भेजकर पहचान करवाई। इसके बाद आभूषणों का नमूना दिया।
सराफा दुकानदारों ने बताया कि नमूना देने में किसी पंजीकृत दुकानदार को कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन बीआईएस को चाहिए कि जांच करने वाले कर्मचारियों की पहचान पत्र सूचीबद्ध कर सराफा मंडल के पास दे दें। इससे दुकान पर आकर जांच करने वालों की पुष्टि की जा सकती है। क्योंकि नमूने के नाम पर डेढ से तीन ग्राम तक सोने का टुकड़ा लेकर जाते हैं। छह महीने के बाद रिपोर्ट देकर प्रमाणित करते हैं। ऐसे में जांच के नाम पर दुकानदारों का 10 से 20 हजार रुपये छह माह तक फंस जाता है।
रामगढ़ताल थाना क्षेत्र में पिछले चार महीने पहले एक जालसाज पकड़ा गया था। तीन हजार रुपये में पुलिस की वर्दी खरीद उसे पहनकर नौका विहार पर दुकानदारों से वसूली करता था। आरोपी जेब में पुलिस की आईडी कार्ड भी रखता था। 19 मार्च को शाहपुर इलाके में एक युवक पकड़ा गया था। पुलिस की वर्दी पहनकर वह रील बना रहा था। नकली पुलिस को देख असली पुलिस भी हैरत में आ गई। इसके बाद जांच में मामला खुला कि आरोपी, फर्जी पुलिस बनकर धौंस जमाने के साथ वसूली करता था।
बीआईएस संयुक्त निदेशक मोहम्मद रिजवान ने कहा कि सरकारी एजेंसी, कर्मचारी संगठन को अपने कार्रवाई की जानकारी नहीं देती है। यह व्यावहारिक नहीं है। लखनऊ जोन से हालमार्क के लिए सिर्फ दो कर्मचारी ही अधिकृत हैं। एक शमशुल खान और दूसरे आशीष, यही दोनों नमूना लेने जाएंगे। इसके अलावा अगर कोई और जाता है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग में कर सकते हैं। बीआईएस के जिम्मेदारों का नंबर सभी व्यापारियों के पास होता है। इसके अलावा 0522-2306664 नंबर पर फोन कर भी व्यापारी संबंधित के बारे में जानकारी ले सकते हैं।