गोरखपुर जिले में दफ्तर खोलकर जालसाजी करने की पहली घटना पिनकन ग्रुप की नहीं है। इसके पहले भी यहां की भोली-भाली जनता को ठगने का धंधा कई लोगों ने किया है। स्पीक एशिया ने दस साल पहले यहां पर एक हजार करोड़ रुपये की जालसाजी की थी। बाद में उसके आरोपी को दिल्ली पुलिस ने 2016 में गिरफ्तार किया और सामने आया कि आरोपी राम निवास पाल ने 2200 करोड़ रुपये की जालसाजी की थी। इसके अलावा भी कई संस्थाएं गोरखपुर में जालसाजी कर चुकी हैं।
जानकारी के मुताबिक, स्पीक एशिया एक ऑनलाइन सर्वे मार्केटिंग कंपनी थी। राम निवास पाल ने अपने भाई राम सुमिरन पाल के साथ मिलकर सिंगापुर में स्पीक एशिया कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया। 2010 में दोनों भाइयों ने मनोज शर्मा की मदद से भारत में स्पीक एशिया को लांच किया। शुरुआत में इन्होंने कंपनी के वेब सब्सक्रिप्शन के नाम पर 11 हजार रुपये वसूलने शुरू किए।
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इस वेब सब्सक्रिप्शन के जरिए मल्टीनेशनल फर्म का सर्वे फार्म भरने के लिए कहा जाता था। इसके एवज में 52 हजार रुपये का भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया गया। 2010 से 2011 के बीच कंपनी ने वादे के अनुसार कई निवेशकों को भुगतान भी किया। चेन प्रणाली पर आधारित इस कंपनी ने महज कुछ महीनों के भीतर 24 लाख निवेशकों को अपने साथ जोड़कर करीब 2276 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए थे।