- 18 दिसंबर 2017: उरुवा थाने में तैनात रहे ट्रेनी दरोगा अभिजीत कुमार और रघुनंदन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि बिहार के गोपालगंज के छात्र एहसान आलम को धोखे से उसका दोस्त अफजल गोरखपुर लाया था फिर परिचित दोनों दरोगा की मदद से तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी।
- 2006 में कुशीनगर जिले के एक कारखाने में युवक की हत्या हुई थी। जिसका सिर काट दिया गया था। आरोप था कि सरकारी जीप का इस्तेमाल कर दरोगा निर्भय नारायण सिंह ने शव को गंडक नदी में बहा दिया था। इस मामले में आईजी के आदेश पर तब केस दर्ज हुआ था और बाद में दरोगा की गिरफ्तारी भी हुई थी। यह मामला भी काफी चर्चित रहा था।
- 2000 में शाहपुर थाने में पूछताछ के लिए लाए गए युवक की मौत हो गई थी। आरोप था कि एएसपी ने मारपीट की, इसमें थानेदार भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस तत्कालीन थानेदार रहे संजय सिंह पर दर्ज किया था। बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई थी और जेल भेजा गया था।
डीआईजी जे रविंद्र ने कहा कि घटना में जब भी पुलिसकर्मी का नाम सामने आया, उन पर सख्ती से कार्रवाई की गई । कुछ पुलिस कर्मियों का इस तरह की घटनाओं में शामिल होना चिंतनीय है। इससे विभाग की छवि भी खराब होती है। समय-समय पर काउंसिलिंग कराई जाती है, ताकि उनका व्यवहार सही रहे।
खजनी इलाके के मऊधरमंगल गांव में बीते 24 जुलाई को लखनऊ में तैनात सिपाही प्रमोद यादव ने अपने भाई एसएसबी जवान भागवान दास यादव के साथ मिलकर बवाल किया। प्रमोद यादव ने पिस्टल से दो लोगों को गोली मार दी। पुलिस हत्या की कोशिश व अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज भगवान दास को जेल भेज चुकी है, जबकि प्रमोद यादव की तलाश में दबिश दे रही है।
केस दो
27 सितंबर 2021 को रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेस में कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता की हत्या हुई थी। इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, राहुल दुबे, विजय यादव, सिपाही कमलेश यादव, प्रशांत सिंह हत्या के आरोपी बनाए गए थे। वर्तमान में सभी जेल में बंद हैं।
केस तीन
21 जनवरी 2021 को स्वर्ण व्यापारी का अपहरण कर नौसड़ के पास 30 लाख रुपये की लूट हुई। पुलिस ने पर्दाफाश कर बस्ती में तैनात दरोगा धर्मेंद्र यादव, सिपाही महेंद्र यादव व संतोष यादव को गिरफ्तार कर लूटे गए जेवर व नकदी को बरामद किया था। जांच में यह भी पता चला कि पुलिसकर्मियों ने इससे पहले 80 लाख के जेवर भी लूटे थे। सभी जेल भेजे गए थे।
केस चार
22 मई 2019 को वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रामशरण श्रीवास्तव से दो लाख रुपये रंगदारी वसूलने के मामले में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज रहे शिव प्रकाश सिंह और कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर यह केस पुलिस ने नहीं दर्ज किया था। ना ही तब डॉक्टर को पुलिस पर भरोसा था। डॉक्टर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर शिकायत की थी और उनके ही आदेश पर रातोंरात पुलिस हरकत में आई और केस दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की। पुलिस ने रुपये भी वापस कराए थे।