फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: स्कूल बस में चढ़ते समय गिरा मासूम, पहिए से कुचला सिर; मौके पर मौत, बच्चे बोले- बस में नहीं थे कंडक्टर अंकल

Sun, 13 Sep 2026 10:28 AM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, जंगल धूषण/पिपराइच

सार

पांच वर्षीय हिमांशु निषाद की मौत की खबर सुनते ही मां सोनी देवी और दादा स्वामीनाथ का दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा। चिकित्सकों के मौत की पुष्टि करते ही दोनों फफक पड़े। कुछ देर बाद हालत ऐसी हुई कि मां और दादा बेहोश हो गए। होश में आने पर रोते रहे। हालत यह थी कि राेते-रोते वह बार-बार बेहोश हो जा रहे थे। मां को रोता देख नौ माह की मासूम दिव्यांशी भी बिलखने लगी। परिवार की इस हालत को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
विज्ञापन
हादसे में मासूम की मौत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिपराइच इलाके के नैयापार बुजुर्ग गांव में शनिवार सुबह स्कूल बस में चढ़ते समय हिमांशु निषाद (5) नीचे गिर गया और पिछले पहिए से सिर कुचलने से उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद चालक मनोज कुमार बस छोड़कर भाग गया। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बस को घेरकर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम और पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा देकर ग्रामीणों को शांत कराया।
विज्ञापन

हिमांशु सुबह करीब 8:30 बजे गांव के मंदिर के पास स्कूल बस का इंतजार कर रहा था। आराजी चौरी चिलबिलवा स्थित एसडी पब्लिक स्कूल की बस बच्चों को लेने पहुंची। हिमांशु बस में चढ़ने के लिए आगे बढ़ा तभी असंतुलित होकर नीचे गिर गया। इसी दौरान बस आगे बढ़ गई और उसका पिछला पहिया हिमांशु के सिर पर चढ़ गया।

सूचना पर पहुंची पुलिस उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपराइच ले गई जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। हिमांशु के पिता हरिकेश निषाद बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। मां सोनी निषाद का रो-रोकर बुरा हाल है। हिमांशु का एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन है। हादसे के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।

शिक्षिका पर मोबाइल देखने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि बस में तैनात शिक्षिका बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल देख रही थीं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि चालक ने हिमांशु के सुरक्षित बस में चढ़ने की तसल्ली किए बिना वाहन आगे को बढ़ा दिया। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

उन्होंने बस को घेर लिया और उसमें मौजूद शिक्षिका को भी रोक लिया। ग्रामीण स्कूल प्रबंधन और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे थे। सूचना पर वरिष्ठ उप निरीक्षक भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में एसडीएम भी पहुंचे। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर कार्रवाई का भरोसा देकर ग्रामीणों को शांत कराया। पुलिस ने शिक्षिका को सुरक्षित बाहर निकालकर थाने भेज दिया।

चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, तलाश तेज
पिपराइच पुलिस ने मामले में आरोपी चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने, लापरवाही से मासूम की मौत होने और जानबूझकर अपमान करने की धारा में प्राथमिकी दर्ज की है। हादसे के बाद भागे चालक मनोज कुमार की तलाश की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज भिजवा दिया है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि बच्चों के बस में चढ़ने और उतरने के दौरान चालक और स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय हो। लापरवाही मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस संबंध में एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। चालक की तलाश की जा रही है।

बच्चे के परिवार से हमारे घरेलू संबंध हैं। घटना बेहद दुखद और असहनीय है। चालक से गलती हुई है। भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी व्यवस्था की जाएगी: संतोष चौहान, प्रबंधक, एसडी पब्लिक स्कूल

गुस्साए ग्रामीणों ने चार घंटे किया हंगामा, गांव में फोर्स तैनात
पिपराइच इलाके के नैयापार बुजुर्ग गांव में मासूम हिमांशु निषाद की मौत पर गुस्साए ग्रामीणों ने करीब चार घंटे तक घटना स्थल पर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह और सीओ कुंदन कुमार सिंह को परिवार की ओर से मांगपत्र सौंपा गया। अधिकारियों ने यथासंभव मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। स्थिति को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।

मासूम की मां सोनी देवी ने उपजिलाधिकारी को मांगपत्र में परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने और स्कूल बंद कराने की मांग की। ग्रामीणों ने भी इन्हीं मांगों को लेकर आवाज उठाई। मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह और सीओ कुंदन कुमार सिंह ने मांगों पर यथासंभव कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन समाप्त किया। सीओ कुंदन कुमार सिंह ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण भी किया।

मासूम की मौत की खबर सुनते ही मां और दादा हुए बेहोश
पांच वर्षीय हिमांशु निषाद की मौत की खबर सुनते ही मां सोनी देवी और दादा स्वामीनाथ का दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा। चिकित्सकों के मौत की पुष्टि करते ही दोनों फफक पड़े। कुछ देर बाद हालत ऐसी हुई कि मां और दादा बेहोश हो गए। होश में आने पर रोते रहे। हालत यह थी कि राेते-रोते वह बार-बार बेहोश हो जा रहे थे। मां को रोता देख नौ माह की मासूम दिव्यांशी भी बिलखने लगी। परिवार की इस हालत को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के भरण-पोषण और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हरिकेश मुंबई में पेंट-पॉलिश का काम करते हैं। घर की जिम्मेदारियों के बीच बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य के सपने संजोए पिता हरिकेश को जब बेटे की मौत की खबर मिली तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बच्चे के लिए परिवार ने बेहतर भविष्य की उम्मीदें पाल रखी थीं, उसकी अचानक मौत ने सब कुछ बदल दिया। हादसे के बाद गांव में आक्रोश भी बढ़ता गया। ग्रामीणों का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही का खामियाजा एक परिवार को अपने मासूम की जान गंवाकर भुगतना पड़ा है।
 

साथी की माैत से सहमे बच्चे, बोले- बस में नहीं थे कंडक्टर अंकल
स्कूल बस में रोज साथ आने-जाने वाले बच्चों के लिए शनिवार का दिन सामान्य नहीं था। हादसे के बाद बस में सवार मासूम छात्र सहमे नजर आए। बच्चों ने बताया कि बस में कंडक्टर अंकल नहीं थे। बच्चे खुद ही बस में चढ़ और उतर रहे थे। कक्षा दो के छात्र रितिक ने बताया कि वह तीन साल से स्कूल में पढ़ रहा है और करीब एक साल से इसी बस से आता-जाता है।

उसके मुताबिक, आमतौर पर कंडक्टर अंकल बच्चों को बस में चढ़ाने और उतारने में मदद करते थे। शनिवार को वह बस में नहीं थे। रितिक ने कहा कि कंडक्टर अंकल आज नहीं थे। शायद इसीलिए ऐसा हो गया। हिमांशु बहुत अच्छा था। चिलबिलवा निवासी साबना खातून भी इसी बस से कक्षा चार में पढ़ने जाती है। हादसे के बाद वह भी सहमी हुई थी। वहीं पिपरही गांव निवासी दिनेश सिंह की बेटी साधना सिंह भी इसी बस से स्कूल आती-जाती है।
विज्ञापन

घटना की जानकारी पर वह बस में हुए हादसे को लेकर दुखी नजर आई। उसने कहा कि यह कैसे हो गया, पता नहीं। रोज स्कूल जाने के लिए इसी बस में बैठने वाले बच्चों के लिए साथी की मौत का यह हादसा एक ऐसी घटना बन गया, जिसे वे लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें