फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेशी सैलानियों को 'आवाज' देंगे गोरखपुर के कब्रिस्तान, जानिए कैसे

Thu, 28 May 2020 06:33 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।

सार

  • सेमेट्री टूरिज्म के तहत ब्रिटिशकाल के ईसाई कब्रिस्तानों में दफन लोगों का ब्यौरा जुटा रहा पर्यटन विभाग
  • पुरखों के स्मृतियों की डोर उन्हें शहर से जोड़ेगी, पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
विज्ञापन
Gorakhpur graveyard - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुराने कब्रिस्तान और सैकड़ों साल पहले उनमें दफन मुर्दे भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। यह सुनकर हैरत हो सकती है, लेकिन पुरखों के स्मृतियों की डोर से उन्हें जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने शहर में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बने कब्रिस्तानों को पर्यटन स्थल के तौर पर बढ़ावा देने का फैसला किया है।

विज्ञापन


इसके तहत गोरखपुर शहर में मौजूद ईसाई कब्रिस्तानों में दफन लोगों की जानकारी ऑनलाइन एकत्र कर, पयर्टन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। यह काम पूरा हो जाने पर विदेशी पर्यटकों को पहले की तरह यहां आकर पुरखों की कब्र तलाशने के लिए इन कब्रिस्तानों में नहीं भटकना होगा।

वे अपने देश से ही इंटरनेट के जरिए पुरखों की कब्र का पता लगाकर गोरखपुर आकर श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे। शोधार्थी ब्रिटिश काल के कब्रिस्तानों की वास्तुकला को देखने आ सकेंगे। इससे उनकी परेशानी भी कम हो जाएगी और समय भी बचेगा।
विज्ञापन


दूसरी ओर राज्य सरकार को पर्यटकों के आने पर विदेशी मुद्रा की आय होगी। पर्यटन विभाग की मानें तो पुराने मामलों में लोग कंप्यूटर में दफनाने की तारीख डालकर अपने पुरखों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। जो मामले ज्यादा पुराने नहीं हैं, उनमें नाम के सहारे ही ब्योरा तलाशा जा सकता है।

विज्ञापन

शहर का सबसे पुराना कब्रिस्तान है पैडलेगंज कब्रिस्तान

Gorakhpur graveyard - फोटो : अमर उजाला।
तमाम आंकड़ों को डिजिटल स्वरूप देने का काम जल्द पूरा किया जाएगा। हर महीने विदेशी पर्यटक अपने पुरखों की कब्र तलाशने महानगर के विभिन्न कब्रिस्तानों में आते हैं, लेकिन रिकॉर्ड बेहतर नहीं होने की वजह से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

पैडलेगंज स्थित गोरखपुर क्रिश्चिन सिमेट्री में शहर की सबसे पुराना कब्रिस्तान है। यहां 1800 ई. से लेकर अब तक कई लोग दफन किए गए हैं। यहां मौजूद 1500 कब्र में ज्यादातर अंग्रेजी सैनिकों से जुड़ी है।

यहां अक्सर ब्रिटेन, स्कॉटलैंड और ऑयरलैंड से विदेशी पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। इसके अलावा बशारतपुर में भी कब्रिस्तान मौजूद है। वहीं शहर के अन्य कब्रिस्तानों की सूची पर्यटन विभाग की ओर से तैयार की जा रही है।

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्रा ने कहा कि शहर के पुराने ईसाई कब्रिस्तान को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना प्रदेश सरकार ने तैयार की है। इसके तहत शहर में मौजूद पुराने कब्रिस्तानों को ब्यौरा मांगा गया था। उसे तैयार कर शासन को मुहैया कराया गया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें