ताल में गिर रहा 17 मोहल्लों का गंदा पानी, मोहद्दीपुर और कुनराघाट के लोग बदबू से परेशान
गोरखपुर। रामगढ़ताल घूमने आने वाले पर्यटक इन दिनों बर्फ जैसे सफेद झागों को लेकर चक्कर में हैं। बर्फ के भ्रम में जैसे ही उस ओर बढ़ते हैं, उनकी नाक भौं सिकुड़ जाती हैं। दरअसल 17 मोहल्लों का गंदा पानी गिरने और बढ़ते ताप से रामगढ़ताल महकने लगा है। कुनराघाट के पास पानी एकदम काला दिखता है। कुनराघाट, मोहद्दीपुर के लोग रामगढ़ताल की तरफ जाने से कतराने लगे हैं। आसपास रहने वासों की शिकायत है कि बृहस्पतिवार को बारिश के बाद ताल में बदबू और बढ़ गई थी।
नौका विहार की तरफ रामगढ़ताल का पानी थोड़ा साफ नजर आता है। लेकिन, कुनराघाट के पास यह काला नजर आ रहा है। मोहद्दीपुर के अभिषेक ने बताया कि रिंग रोड बनकर तैयार हुआ तो उस तरफ रोज टहलने जाते थे। उधर, जलकुंभी की भी सफाई हुई थी। लेकिन, अब एक बार फिर ताल में गंदगी फैल गई है। सुबह जाने पर बदबू आती है। इसीलिए अब रिंग रोड की जगह टहलने के लिए वी पार्क जाते हैं।
कुनराघाट की रहने वाली विभा सिंह ने बताया कि स्कूटी से पुलिया के पास से गुजरने पर बदबू आती है। पानी एकदम काला हो गया है और उसमें सफेद झाग दिखता है। ऐसा लगता है जैसे नाले का गंदा पानी सीधे ताल में छोड़ा जा रहा है।
हाईडिल कॉलोनी की तरफ रहने वाले शशांक मिश्रा ने कहा कि एक दिन फल खरीदने आरकेबीके के पास गए थे। ताल में सफेद झाग दिख रहा था। बदबू भी आ रही थी। इस वजह से वहां से फल खरीदकर तुरंत हट गए।
गोड़धोइया से जुड़े मोहल्लों का सीधे आ रहा पानी
गोड़धोइया नाले से जुड़े 17 मोहल्लों का गंदा पानी रामगढ़ताल में गिर रहा है। इस पानी के प्राकृतिक विधि से शोधन के लिए कुनराघाट के पास उपाय किए गए हैं, फिर भी केमिकलयुक्त पानी से वहां पर सफेद झाग बन रहा है। कैंट स्टेशन के पास 38 एमएलडी का एसटीपी दिसंबर तक पूरा होगा। गंदे पानी से ताल की सुंदरता पर तो ग्रहण लग ही रहा है, आसपास के लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।
सीढ़ीनुमा संरचना से गुजारकर छोड़ते हैं पानी
जल निगम नगरीय के अधीक्षण अभियंता रतनसेन सिंह का कहना है कि गोड़धोइया नाले की तरफ से आने वाले पानी को पुलिया के आगे बनाए गए तालाब में रोका जाता है। इसे सीढ़ीनुमा संरचना से गुजारकर रामगढ़ताल में गिराया जाता है। तालाब में प्राकृतिक विधि से पानी को शोधित किया जाता है। यहां इसका बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) कम हो जाता है। इसके बाद इसे ताल में छोड़ा जाता है। एसटीपी बन जाने के बाद इसे पूरी तरह ट्रीट कर छोड़ा जाएगा।
जीडीए करेगा जलकुंभी की सफाई
रामगढ़ताल की खूबसूरती पर अब जलकुंभी दाग नहीं लगा पाएगी। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) 1.88 करोड़ रुपये खर्च कर नई दिल्ली के सर्वोदय नगर की फर्म मेसर्स क्लीनटेक इंफ्रा से डीविडिंग मशीन खरीदेगा। फर्म को 23 जून तक मशीन की आपूर्ति कर देने के निर्देश दिए गए हैं। पुरानी मशीन खराब हो जाने से प्राधिकरण को मैनुअली जलकुंभी की सफाई करनी पड़ती है। इससे श्रम, समय और धन तो खर्च होता ही है, सफाई भी ठीक से नहीं हो पाती। अधिकतर लोहिया एन्क्लेव आवासीय परियोजना के सामने, सहारा एस्टेट और महादेव झारखंडी की ओर जमा रहने वाली जलकुंभी पुरवा हवा के चलते नौकायन रोड पर रामगढ़ताल किनारे तक फैल जाती है। इसे साफ कराने में प्राधिकरण के कर्मचारियों को पसीना बहाना पड़ता है।
बोले लोग...
ताल से गुजरने पर बहुत तेज बदबू आ रही है। एसटीपी चल भी रही है या नहीं, इसके बारे में कुछ पता नहीं। ऐसे ही ताल में गंदा पानी छोड़ा गया तो इसकी खूबसूरती खत्म हो जाएगी।
- धीरेंद्र सिंह
रिंग रोड की तरफ सहेलियों के साथ टहलने जाती थी। एक दिन शाम को काफी तेज बदबू आई। इसके बाद उधर जाना छोड़ दिया। ताल के आसपास रहने पर वाले लोग बदबू से हमेशा परेशान रहते हैं।
- शालिनी मिश्रा