पर्चा नहीं बन पाने पर परिजन महिला को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। वहां रात 10:21 बजे टोकन और पर्चा बना, जिसके बाद भर्ती किया गया। इसके बाद उसे लेबर रूम भेजा गया, लेकिन वहां भी व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। मजबूरन महिला को बेड पर लिटाकर लेबर रूम ले जाया गया, जहां करीब 1 बजे रात में सामान्य प्रसव हुआ।
एम्स में सोमवार को प्रसूता को सुविधाओं के अभाव और सिस्टम की लापरवाही के कारण काफी दर्द झेलना पड़ा। रात एक बजे महिला का नॉर्मल प्रसव हुआ। जच्चा और बच्चा दोनों ही सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
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प्रसूता के परिजनों ने बताया कि सोमवार की शाम को पूनम प्रसव पीड़ा होने पर गाइनी ओपीडी पहुंची।
वहां पर्चे की मांग करने पर परिजन रिविजिट कांउटर पर पर्चा बनवाने पहुंचे, लेकिन भीड़ के कारण पर्चा नहीं बन सका। करीब एक सप्ताह पहले डॉक्टर ने पूनम को सोमवार को बुलाया था। पर उस दिन पर्चा रीविजिट काउंटर पर नहीं बन सका। महिला दर्द से कराहती रही व उसका पति परेशान होकर बार-बार पर्चा काउंटर के चक्कर लगाता रहा।
पर्चा नहीं बन पाने पर परिजन महिला को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। वहां रात 10:21 बजे टोकन और पर्चा बना, जिसके बाद भर्ती किया गया। इसके बाद उसे लेबर रूम भेजा गया, लेकिन वहां भी व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। मजबूरन महिला को बेड पर लिटाकर लेबर रूम ले जाया गया, जहां करीब 1 बजे रात में सामान्य प्रसव हुआ।
इस बीच इमरजेंसी में दर्द से तड़प रही महिला को दर्द कम करने के लिए इंजेक्शन देने की बात कही गई, लेकिन स्टाफ ने उसके साथ आई भाभी को बाहर भेज दिया और मेडिकल गार्ड उसे वहां से हटाने लगे। महिला का कहना है कि उसे पूरा समय इधर-उधर दौड़ाया गया और कहा गया कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर जाकर शिकायत करें।
कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह गलत है। मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत के बाद उन्होंने कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी।
सीलिंग का टुकड़ा गिरा मरीज पर, मरीज सुरक्षित
स्त्री एवं प्रसूति रोग वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज के ऊपर छत का सीलिंग टूटकर गिर गया। गनीमत रहा कि सीलिंग हल्की होने की वजह से मरीज को कोई गंभीर चोट नहीं आई। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने जल्द ही मरम्मत का आश्वासन दिया।