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Gorakhpur News: प्राइवेट नौकरी के बहाने किराए पर लेते थे कमरा, लूटपाट करते थे चाचा-भतीजा

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पहले देवरिया फिर सिद्धार्थनगर में बनाया था ठिकाना, लूट की रकम से करते थे अय्याशी
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गोरखपुर। पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए चाचा-भतीजा प्राइवेट नौकरी करने की बात कहकर किराए का कमरा लेते थे। इसके बाद रात में रेकी कर लूट व छिनैती की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस के मुताबिक, वारदात में मिली रकम से दोनों अय्याशी करते थे। उन्होंने अपने घरवालों को भी अंधेरे में रखा था। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने परिवार में कहा था कि दोनों एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी कर रहे हैं।



एसपी नार्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी चार माह पहले औरैया से देवरिया गए थे। वहां तीन माह में आधा दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस का दबाव बढ़ते ही अश्वनी भतीजे शिवा के साथ सिद्धार्थनगर आ गया। वहां बांसी कस्बे में किराए का मकान लिया। इसके बाद वहां लूटपाट शुरू कर दी।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात में प्रयुक्त बाइक भी लूट की रकम से डेढ़ माह पहले ही खरीदी थी। आरोपियों ने औरैया के अलावा देवरिया व सिद्धार्थनगर में भी वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की है। उनकी आपराधिक इतिहास खंगाली जा रही है।







लक्जरी लाइफ जीने के चक्कर में चले गए हवालात



पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे मध्यमवर्गीय परिवार से हैं लेकिन उनकी दोस्ती अच्छे घर के लड़कों से थी। उन्हें भी लक्जरी लाइफ जीने की इच्छा थी। इसके चलते दोनाें ने कम समय में अधिक रुपये कमाने की चाहत में लूटपाट का रास्ता चुन लिया। शुक्रवार देर रात भी दोनों लूट के इरादे से निकले थे लेकिन पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उन्हें दबोच लिया।
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रेकी कर देते थे वारदात को अंजाम



पकड़े गए चाचा-भतीजे अक्सर महिलाओं को ही निशाना बनाते थे। अधिकतर वह सुनसान स्थान को चुनते थे। लूट की वारदात जहां करनी होती थी, वहां पहले रेकी कर शाॅर्ट रास्ता भी देख लेते थे ताकि वारदात को अंजाम देने के बाद वे आसानी से भाग सकें। ढाबा संचालक से भी लूटपाट के बाद वह हाईवे के बजाए आगे सर्विस लेन पकड़ लिए थे।
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